Raksha Bandhan

47प्रतिवर्ष श्रावणी-पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार होता है, इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा-सूत्र बांधती हैं । यह रक्षा सूत्र यदि वैदिक रीति से बनाई जाए तो शास्त्रों में उसका बड़ा महत्व है ।

वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि :

इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है –
(१) दूर्वा (घास) (२) अक्षत (चावल) (३) केसर (४) चन्दन (५) सरसों के दाने ।
इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।
इन पांच वस्तुओं का महत्त्व –

(१) दूर्वाजिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बदता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।
(२) अक्षतहमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
(३) केसरकेसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।
(४) चन्दनचन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।
(५) सरसों के दानेसरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम गुरुदेव के श्री-चित्र पर अर्पित करें । फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे ।

महाभारत में यह रक्षा सूत्र माता कुंती ने अपने पोते अभिमन्यु को बाँधी थी । जब तक यह धागा अभिमन्यु के हाथ में था तब तक उसकी रक्षा हुई, धागा टूटने पर अभिमन्यु की मृत्यु हुई ।

इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं हम पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सूखी रहते हैं ।

राखी बाँधते समय बहन यह मंत्र बोले –

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल: |
तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल ||

शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बाँधते समय –
‘अभिबन्धामि ‘ के स्थान पर ‘रक्षबन्धामि’ कहे |

Part-1

Part-2

 

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बापू के ऐसे आश्रमवासी और साधक चिन्मय सुख के अधिकारी हैं

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ईश्वर प्राप्ति के लिए संसारी चीजो की जरुरत नही

संसार से इंद्रियां सुख, मनुष्य को बनाएंगे भोगी

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नितय नवीन सुख का अनुभव

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संत परम स्वतंत्र होते हैं !

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Khali Samajh Le aur Sadacharan Kar len (Tatvic Satsang) – Sant Shri Asaram ji Bapu

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Khali Samajh Le aur Sadacharan Kar len  (Tatvic Satsang) – Sant Shri Asaram ji Bapu
खाली समझ लें और सदाचरण कर लें …
भगवान कहीं बैठ कर दुनिया बनाता है ..ये वहम निकाल दो …..
जो भगवान नहीं हैं , वो हाथ खड़ा करो …..ऐसा नहीं मानना है कि कोई दो हाथ पैर वाला , चार हाथ पैर वाला कहीं बैठ कर दुनिया बनाता है ….
भगवान अगर हमसे अलग हैं तो व्यापक नहीं है …हम भगवान से अलग है तो हम जड़ हैं …जड़ होते तो बोलते कैसे ? …
उस भगवान को पाने का , उसके स्वरुप को जानने का बस एक बार लगन लग जाए …ये आत्मज्ञान की विद्या ऐसी दिव्य विद्या है कि इसमें शरीर को सताना नहीं है , किसी देव को बुलाना नहीं है …कुछ नया बनाना नहीं है …..केवल जो जैसा है वैसा समझ कर ….. परम तृप्ति … परम प्राप्ति …

3 दिन में हो सकता है साक्षात्कार

https://www.youtube.com/watch?v=xYnqRgH-xFI&feature=youtu.be

 

स्वामी रामतीर्थ जीवन और दर्शन

चित में आत्म प्रकाश

परहित के लिए काम, हृदय में शांति और आनंद का आगामान

अति उत्तम साधक को 3 में ईश्वर प्राप्ति

सहन शक्ति पृथ्वी की नाय

सुनम जेसे सौराभ

सूर्य जेसा प्रकाश

शेर जेसी निर्भिकाता

गुरुवो जैसे उदारता

आकाश जेसी व्याप्तता

संसार से तड़प

TAG – संत आसाराम बापू, ब्रम्ह ज्ञानी, स्वामी रामतीर्थ, चित, परहित, शांति और आनंद, ईश्वर प्राप्ति, सहन शक्ति, सुनम, सूर्य, शेर, गुरुवो, आकाश, संसार

Gajanan Maharaj ki adbhut samata aur divya lila prasang-Shegaon – Pujya Bapuji

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Gajanan Maharaj ki adbhut samata aur divya lila prasang-Shegaon – Pujya Bapuji
What kind of company do you keep? Who do you associate with? Associations have a lot to do with the development of your life. The type of people one lives with, the people whom he serves or gets service from and the expectations in his mind all go a long way toward building the individual’s life style.

Hari Om

आपका उद्देश्य क्या है ?

https://www.youtube.com/watch?v=fTC-w2S5NV0

 

भगवान हरि का नाम लेने से मंगल

‘ईश्वर की प्राप्ति’ ही ‘मानव जीवन’ का है ‘परम लक्ष्य’

ईश्वर प्राप्ति के सभी दुखो से मुक्ति

अनुकूलता और प्रतिकूलता प्रकृति का स्वभाव

आत्म सुख ही परम सुख

सत्संग से ही परम सुख

आत्मा अमर है

राग द्वेष ही सभी दुख का कारण

उद्देश्य है सब दुखो से मुक्ति

तुलसीदास के जीवन का किस्सा

TAG – संत आसाराम बापू, ब्रम्ह ज्ञानी, भगवान हरि, ईश्वर की प्राप्ति, अनुकूलता, प्रतिकूलता, आत्म सुख, सत्संग, राग द्वेष, तुलसीदास

Sharir se mamta hati to ise khilana pilana daan punya ho jayega- P.P.Sant Shri Asharamji Bapu

hari
Sharir se mamta hati to ise khilana pilana daan punya ho jayega- P.P.Sant Shri Asharamji Bapu
Keeping a good watch on the dietary habits will naturally develop virtuous qualities in you. ‘Like food like mind’. As per this proverb in Hindi, if you take virtuous food the virtuosity will be enhanced by itself. You will be able to increase your Divine riches with ease and alacrity and get rid of vices and bad behaviour.

Hari Om

शिष्य परम सौभाग्यशाली कब हुआ ?

https://www.youtube.com/watch?v=nFkDOEnVPSM

भगवान वेद व्यास जी

भगवान भक्त पर कृपा करते हैं

गुरु का पूजन

सतगुरु ही सच्चिदानंद परमात्मा

संसार सपना सिर्फ परमात्मा अपना

स्वामी विवेकानंद की जिवनी

ध्यान मुलम गुरु मूर्ति

वामन पंडित की जिवनी

गुरु का अधिकार भगवान से भी बड़ा

गुरु कृपा ही केवलम शिष्य परम मंगलम

TAG – संत आसाराम बापू, ब्रम्ह ज्ञानी, वेद व्यासजी, भगवान, भक्त, गुरु, सतगुरु, सच्चिदानंद, परमात्मा, संसार, स्वामी विवेकानंद, ध्यान, वामन पंडित, गुरु कृपा