आरती और प्रार्थना – स्वामी लीलाशाहजी

lillashahji
आरती
श्री गुरु चरण सरोज रज निजमनमुकुर सुधार
वरनउ रघुवर विमल यश जो दायक फल चार
आनंद मंगल करूं आरती, हरि गुरु संतोनी सेवा
श्री गुरु संतोनी सेवा, प्रेम धरी मंदिर पधारऊ , सुंदर सुखड़ा लेवा |
…. आनंद मंगल
रत्न कुम्भ जिमि बाहर भीतर अखंड अरुपे एवा
त्रिभुवन तारण भक्त उधारण त्रण भुवन न जेवा |
…. आनंद मंगल
संत मिले तो महा सुख पाऊं गुरूजी मिले तो मेवा
अड़सठ तीरथ सतगुरु चरणे गंगा जमुना रेवा |
…. आनंद मंगल
जेनी आंगणे तुलसी नो कयारो सालग्रामनी सेवा
प्रेम धरी मंदिर पधराऊ, गुरूचरणामृत लेवा |
…. आनंद मंगल
शिव सन्कादिक सुर ब्रह्मादिक् नारद सारद जेवा
कहे प्रीतम ओडखो अणसारे हरि ना जन हरि जेवा |
…. आनंद मंगल
आनंद मंगल करूं आरती, हरि गुरु संतोनी सेवा
प्रेम धरी मंदिर पधारऊ , सुंदर सुखड़ा लेवा |
…. आनंद मंगल

प्रार्थना

निम्मलिखित प्रार्थना स्वामी लीलाशाह को बहुत पसन्द थी, जो प्रत्येक प्रवचन के पश्चात् सत्संगियों से कहलवाते थे | सभी को यह सुन्दर प्रार्थना करनी चाहिए |
हे भगवान!
         हम सबको
               सुबुद्धि दो,
                   शक्ति दो,
                       निरोगता दो,
                           कि अपना अपना
                                 कर्त्तव्य पालन करके
                                                 सुखी बनें |
हरी ॐ शान्ति! शान्ति! शान्ति!!!