आश्रम की औषधी

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 संजीवनी गोली

sanjivani goliलाभ: यह गोली व्यक्ति को शक्तिशाली. ओजस्वी, तेजस्वी व मेधावी बनाती है | इसमें सभी रोगों को नष्ट करने की प्रचंड क्षमता है | यह श्रेष्ठ रसायन द्रव्यों से सम्पन्न होने से सप्तधातु व पंचज्ञानेन्द्रियों को दृढ़ बनाकर वुद्धावस्था को दूर रखती है | ह्रदय, मस्तिष्क व पाचन-संस्थान को विशेष बल प्रदान करती है | इसमें तुलसी-बीज होने से सभी उम्रवालों के लिए यह बहुत लाभदायी है |

सेवन-विधि: छ: माह से दो साल उम्र – आधी गोली, दो से आठ साल – एक गोली, आठ – दस से ऊपरवाले – दो गोली खली पेट चूसकर लें |

सावधानी: सेवन के बाद डेढ़ –दो घंटे तक दूध न लें |

विशेष: सर्दियों में बच्चों और उनके माता-पिता के लिए ‘संजीवनी गोली’ वरदान है |

(ये सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है)

संत च्यवनप्राश –

chvanprash वीर्यवान आँवले, प्रवालपिष्टी, शुद्ध देशी घी और अन्य कुल मिलाकर ५६ द्रव्यों के आलावा हिमालय से  लायी गयी वज्रबला डालकर बनाया गया च्यवनप्राश उत्तम आयुर्वेदिक औषधि, पौष्टिक खाद्य तथा एक दिव्य रसायन है |

लाभ : बालक, वृद्ध, स्त्री-संभोग से क्षीण तथा ह्र्द्यरोगियों के लिए विशेष लाभकारी | स्मरणशक्ति व बुद्धिवर्धक तथा कांति, वर्ण और प्रसन्नता देनेवाला | खाँसी, श्वास, वातरक्त, वात व पित्तरोग, शुक्रदोष, मूत्ररोग आदि दूर करनेवाला | बुढ़ापा देरी से लानेवाला तथा टी.बी. व ह्रदयरोगनाशक तथा भूख बढ़ानेवाला है |

सेवन विधि : १ से २ चम्मच दूध या नाश्ते से पूर्व लें |

केशरयुक्त स्पेशल च्यवनप्राश भी उपलब्ध है |  (ये सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है)

पुष्टि टेबलेट

pusthi tabletश्रेष्ठ रसायन औषोधियों से युक्त यह टेबलेट शरीर को हृष्ट-पुष्ट और शक्तिशाली बनाती है | खासकर सर्दियों में कृशकाय एवं दुर्बल व्यक्तियों को इसका सेवन लाभदायी है |

सेवन विधि : ४ – ४ गोली सुबह-शाम पानी, दूध अथवा च्यवनप्राश से लें |

विशेष : इसके सेवन के बाद खुलकर भूख लगने पर पौष्टिक आहार लें | इन दिनों भोजन में घी, दूध, मक्खन, केला, खजूर, सुखा मेवा आदि पौष्टिक पदार्थो का सेवन करें |

(ये सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है)

–    ऋषिप्रसाद – जनवरी २०१४ से

About Asaram Bapuji

Asumal Sirumalani Harpalani, known as Asaram Bapu, Asharam Bapu, Bapuji, and Jogi by his followers, is a religious leader in India. Starting to come in the limelight in the early 1970s, he gradually established over 400 ashrams in India and abroad.