आश्रय और प्रीति

संसार की प्रीति से पतन होता है

ईश्वर का आश्रय लो

ईश्वर प्राप्ति बहुत सरल है

बाहर का रस से अच्छा है अंदर का रस

आनंद स्वरूप ब्रह्म में स्थित हो

जो समय को बर्बाद करता है समय उसको बर्बाद करता है

ब्रह्म ज्ञान के लिए सद्गुरु बहुत जरूरी

गुरु की सेवा से परम लाभ

संसार एक दिन छूट जाएगा

राग द्वेष से ही कर्म बंधन बनते हैं

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