इच्छा रहित होना परम समाधि है

वशिष्ठ जी ने दिया भगवान राम को सत्संग

इच्छा का त्याग कीजिए

निर्वासित पुरुष सबसे शीतल

स्वर्ग का सुख भी ज्ञानी के सामने कुछ नहीं तो अमेरिका और यूरोप क्या है

ब्रह्मज्ञानी की मत कौन बखाने। ब्रह्मज्ञानी की मत, ब्रह्मज्ञानी जाने

निरवासनिक नारायण स्वरूप से ब्रह्मानंद लगता है अच्छा लगता है

आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयास करो

अष्टावक्र गीता का अध्ययन करो

सद्गुरु का संगम अमोघ होता है

सब इच्छाओं से रहित होना ही परम समाधि है

Tag – संत आसाराम बापू, ॐ , सत्संग, ब्रम्ह ज्ञानी, आत्म साक्षात्कार, वशिष्ठ जी, भगवान राम, इच्छा, निर्वासित पुरुष, स्वर्ग, अमेरिका, यूरोप, आध्यात्मिक उन्नति, अष्टावक्र गीता, समाधि