ऐसे गुरु के शिष्य मृत्यु से भी नहीं डरते

जो संसार में आसक्ति करते हैं वह मुक्त नहीं होते

राग द्वेष से संसार की आसक्ति

सुख-दुख के सिर पर पैर रखो

ब्रह्मज्ञानी के शिष्य मौत से भी नहीं डरते हैं

निगुरे का नही कोई ठिकाना चौरासी में आना जाना

उपनिषद सनातन संस्कृति में सबसे श्रेष्ठ

ब्रह्मज्ञानी अपने में मस्त रहते हैं

संसार नाशवान है

तत्व ज्ञान पाना ही जीवन का उद्देश्य

अंत में सब कुछ छूट जाएगा इसलिए आत्मा को पहचान

जीवन सत्व गुणों से संपन्न होना चाहिए

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