ऐसे लोगों के सामने दुःख नहीं टिक पाता

वशिष्ठ जी और राम जी का संदर्भ

बंधन और मुक्ति क्या है?

शरीर को मैं मानना ही बंधन

दुखों से छूटने का नाम ही मोक्ष

चैतन्य स्वरूप ही है आत्मदेव

मन में दुख आया तो आप दुखी नहीं

सत्संग से ही आत्मदेव की प्राप्ति

भगवान की समृद्धि

संत रामकृष्ण परमहंस जी का संदर्भ

दो प्रकार की प्रगति

आत्म उन्नति के लिए समय निकालो

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