चंचलता के दुष्परिणाम

गुरु ही असली तारणहार

सारे तीरथ सद्गुरु के चरणों में है

गुरु का सानिध्य लो

गुरु की आज्ञा ना मानने से पतन और विनाश अवश्य होगा

जीव अपनी गलतियों से बार-बार जनमता, मरता है और मुक्त नहीं हो पाता

गुरु अपने ज्ञान और सत्संग के द्वारा जीव को आत्म साक्षात्कार करा सकते हैं

महापुरुषों की आज्ञा मानना चाहिए

आत्मसाक्षात्कार जीवन का एकमात्र उद्देश्य बनाओ

जीवन में जब बढ़ाओ

जीवन में धीरज रखो

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