तस्य तुलना केन जायते

वशिष्ट जी का हुआ था बहुत कुप्रचार

अज्ञानी मूर्ख करते हैं महापुरुषों का कुप्रचार

भगवान राम जी और माता सीता ने वशिष्ट जी के चरण धोए थे

संत रहित समाज बहुत दुखी होता है

वशिष्ठ महाराज का क्रोध

राग और द्वेष में फंसे हुए महापुरुषों को समझ नहीं पाते

संत का आदेश मानने से अपना और समाज का भला होता है

ब्रह्म ज्ञानी महापुरुष की तुलना किससे नहीं कर सकते

ब्रह्म ज्ञानी महापुरुषों का अहंकार ब्राह्मी स्थिति का होता है दिखता है पर वास्तव में होता नहीं है

तुकाराम महाराज का सत्संग

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