बापू के ऐसे आश्रमवासी और साधक चिन्मय सुख के अधिकारी हैं

ईश्वर प्राप्ति का इरादा पक्का

जहाँ चाह वहाँ राह

असम्भव कुछ भी नहीं

ईश्वर प्राप्ति के लिए संसारी चीजो की जरुरत नही

संसार से इंद्रियां सुख, मनुष्य को बनाएंगे भोगी

ईश्वर और संतो से चिन्मे सुख, मनुष्य को बनाएंगे योगी

नितय नवीन सुख का अनुभव

पाप से हृदय तपन

भगवान नारायण के दो हृदय -वैकुंठ और ब्राह्मणानी का हृदय

अपने साथ अन्याय ना करो, संतों की शरण जाओ

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