मिथ्या और सत्य क्या है …… प.पू. संत श्री आशारामजी बापू

Meditation

मिथ्या और सत्य

 

मिथ्या और सत्य क्या है …… प.पू. संत श्री आशारामजी बापू

हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ ………… ॐ  ॐ  ॐ ….. प्रभु प्यारे ॐ, मेरे ॐ, श्यामा ॐ ….

हेलिकॉप्टर टकराते ये देश के रक्षक क्या कर रहे है | हेलिकॉप्टर चलाने को नहीं जानते, ये ठीक है दोनों हेलिकॉप्टर टकराए इतना विशाल आकाश फिर टकराए ऐसे जरुरी है ? टकराना बड़े शर्मनाक बात है | ये रक्षक अगर लापरवाह  हो गये तो रक्षित की क्या हालत होगी | दुखों से सब छुटाने चाहते है, और शाश्वत सुख रस पाना चाहते है, सदा सुखी रहेंगे सबकी बात है | लेकिन जो सदा जहाँ से सुख है उधर का पत्ता नहीं, सदा सुख अनित्यमय कभी नहीं हो सकता ज्यों अनित्य है | तो दो तत्व है, एक है मिथ्या– मिथ्या किसको बोलते है ? पहले नहीं था, बाद में नहीं रहे, बीच में दिखे | समझो ये माला चार दिन में ऐसी रहे बाद में नहीं दिखेगी, लेकिन अभी नहीं बाद में दिखे ये मिथ्या है | ये शामियाना कल नही देखेगा पहले नहीं था ये मिथ्या है और सत्य उसको बोलते है –जो पहले था, अभी है, बाद में रहेगा | मिथ्या किसको बोलते है जो मध्यकालीन प्रतीति हो | सच उसके कहते जो तीनों कालों में प्रतीति न हो और सत्य उसे कहते है जो तीनों काल में ज्यो-त्यों रहे | तो प्रकृति में आठ चीजे होते है गीता में कहा है –
भूमि रापो वायु: खं मनोबुद्धिरेवच |
अहकंर इतीयं में भिन्ना प्रकृतिरष्टधा ||
पंचभौतिक शरीरे पहले नहीं था | ७४ साल पहले नही था, ७५ साल बाद में नही रहेगा | अभी दिखता है लेकिन मिथ्या है | जो कल था वे अभी नहीं है, कितने काल बदल गए अभी स्थान तक उसने काम बदल जायेगे मिथ्या में सतत परिवर्तन है | और सत्य सदा एक रहस्य है | जो सच है, वो चेतन है और चेतन है, वो ज्ञान स्वरुप भी है | और जो ज्ञानस्वरुप है, वो आनंदस्वरुप है | बिना ज्ञान के आनंद का पत्ता कैसे रहेगा |
सच तुम्हारे साथ पहले भी है और मरने के बाद भी रहेगा | जो सच है, वो चेतन है, जो चेतन है, वो ज्ञानस्वरुप है और आनंदस्वरूप भी है, माँ के जेड के साथ बच्चे की नाभि ज्ञान के जुडती है की बेवकूफी से जुडती है क्या ? ज्ञान से साथ जोडती | नाक के साथ क्यों नहीं जोडती, कान के साथ जाए, कभी भी जुड जाए, कभी नाभि के जेड के साथ जुडती है | नाक नहीं जुडता, कान नहीं जुडता इसमें ज्ञान सत्ता, स्वभाव सत्ता है, सतसत्ता परमात्मा की है | बचपन सच्चा होता तो जिनको बचपन चला  गया लेकिन उसको जाननेवाला चैतन्य सत्ता अभी है, बचपन मिथ्या है, बचपन का साक्षी सच है, बचपन के दुःख-सुख मिथ्या है लेकिन दुःख-सुख साक्षी का सच है | जवानी के ऊँचे तरंग होते है, क्या-क्या तरंग से नाचे | जितने तरंगों से नाचे थे, उन तरंगों से पहुंचे आखिर वहाँ से निकली निराशा मिली बदल गया सब लेकिन उसको जाननेवाला नही बदला वो सदा सच है | वो चेतन है, आनंद है, आनंदस्वरूप है और ज्ञान है अपने-अपने में सम है, और समता सहज स्वाभाविक है | विषमता प्रकृति है, प्रकृति शरीरों में ८४ लाख योनिओं से भटकते आये फिर विषमता के साथ एक समता हो गई | विषमता का पता नहीं खबर नहीं इसी कारण मनुष्य जीवन पाने के बाद भी दुखों के पार नहीं गए | श्रीकृष्ण कहते की – सुखद अवस्था मे से दुःखत अवस्था में अवस्था प्रकृति मे है और पूर्ण परमात्मा के अवस्था में अंशी में अंश है तब तक क्या नहीं डालेगा तब तक परिवर्तित चीजों कितना भी ऊंचाई को छुए तो पूर्ण नहीं हुई | श्रीकृष्ण कहते है की –
संतुष्ट: सततं योगी यतात्मा दृढ़ निष्ठाय:|
मध्यर्पित मनोबुद्धियों मध्यत्क: रामे प्रिय: ||

गोधरा सत्संग, दिनांक – 30 अगस्त २०१२ भाग -७

About Asaram Bapuji

Asumal Sirumalani Harpalani, known as Asaram Bapu, Asharam Bapu, Bapuji, and Jogi by his followers, is a religious leader in India. Starting to come in the limelight in the early 1970s, he gradually established over 400 ashrams in India and abroad.