रसमय ध्यान

रस्मे साधना- एक उत्तम साधना

मंसूर की मस्ती को लोग बिचारे क्या जाने

निगुरा ईश्वर के रस से अंजान

भितर से इश्वर का रस

भगवान भाव के भूखे

मोह माया रूपी संसार से मुक्ति के द्वार तक पहुंचे

प्रभु की प्रीती करो

प्रभु की सारी लीला

प्रभु के अलावा कुछ नही

संसार सपना, परेश्वर अपना

TAG- संत आसाराम बापू, ब्रम्ह ज्ञानी, रस्मे साधना, मंसूर, निगुरा, ईश्वर, भाव, मोह माया, संसार, मुक्ति