शास्त्र कथा अमृत

दिरगे तप्पा ऋषि की कथा

पावक और पूर्णांक थे दिरगे तप्पा ऋषि के पुत्र

ऋषि परमात्मा पद में स्थित हुए

ईश्वर ही सच्चिदानंद स्वरुप है

भगवान श्री कृष्ण के जीवन में आत्मारस झालकता है

सुख और आनंद में अंतर है

सुख सिर्फ दुख को दबाता है

आनंद दुख को उखाड़ फेकता है

आनंद सस्वता की तरफ ले जाता है और सुख भोग की तरफ ले जाता है

सुख ज्ञान और विवेक को दबाए रखता है

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