श्रद्धा, सेवा और गुरु में ईमानदारी

काम दबा तो क्रोध का रूप लेता है

क्रोध से बुद्धि नष्ट होती है

काम और क्रोध रजोगुण से उत्पन्न होते हैं

इमानदारी से जीवन जीना चाहिए

गुरु गोविंद सिंह की कथा

ब्रह्मज्ञानी त्रिकाल ज्ञानी होता है

संत के दर्शन से बहुत लाभ होता है

कर्म की गति बहुत रहस्यमई है

सब सोहम है

राग द्वेष से भगवान नहीं मिलते

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