संसार मुसाफिर खाना है

सबको सारी इच्छा पूरी ना होने का डर और दुख है

ब्रह्मज्ञानी ही मनुष्य के सारे दुख हर सकते हैं

ब्रह्मज्ञानी ईश्वर का स्वरूप है

एक दिन सब छूट जाएगा

भगवान के नाम का चिंतन और प्रीति करो

मन की चंचलता से बच्चे

मन की वासना बहुत दुखदाई

मन्द प्रारब्ध, तीव्र प्रारब्ध, तरतीव्र प्रारब्ध

संसार दुख देने वाला है

संत कबीर का प्रसंग

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