सद्गुरु को शरीर मानना क्यों है अपराध ?

यज्ञ से भी बड़ा है सत्संग का पुण्य

सत्संग का पुण्य है महा पुण्य

देवराज इंद्र भी संत की शरण में आकर अपना सर झुकाते हैं

पूरा संसार सिर्फ सपना

बाहर की सुख सुविधा ज्ञानी के पीछे पीछे रहते हैं

जिसको आपको संतोष है वह ईश्वर है

ब्रह्मज्ञानी की शोभा ब्रह्मज्ञानी जाने

राग द्वेष मिटाना है

ब्रह्मज्ञानी ही आप परमेश्वर

अज्ञान से दुख नहीं मिलते

अपने आत्म स्वरूप को जानो

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