साधकों के लिये विशेष… पूज्य बापूजी की कल्याणकारी अमृतवाणी

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साधकों के लिये विशेष… पूज्य बापूजी की कल्याणकारी अमृतवाणी

गुरु हमें गुरु-परंपरा से प्राप्त कई अनुभवों से सार-सार बातें बता रहे हैं । चाहे कैसी भी गंदी-पुरानी आदत होगी, त्रिबंध प्राणायाम से उसे आप उखाड़ फेंकने में सफल हो जाओगे । हर आदमी में कोई-न-कोई कमजोरी होती है और दूसरे लोग उसे चाहे जानें या न जानें लेकिन हम अपने-आपकी कमजोरी बिल्कुल जानते हैं । त्रिबंध प्राणायाम से उस कमजोरी को निकालने में आप अवश्य सफल हो जाओगे । 
त्रिबंध प्राणायाम करो । फिर जो कमजोरी है मन से उसको सामने लाओ एवं मन-ही-मन कहो कि : ‘अब मैं इस कमजोरी के आगे घुटने नहीं टेकूँगा । भगवद्कृपा, भगवन्नाम, मंत्र मेरे साथ है । हरि ॐ… ॐ… ॐ… हरि ॐ… हरि ॐ… बल ही जीवन है… दुर्बलता मौत है…’ 
मान लो, किसीको दोपहर को भोजन करके सोने की आदत है । दोपहर को सोने से शरीर मोटा हो जाता है और त्रिदोष पैदा हो जाते हैं । बस, यह ठान लो कि : ‘मैं दिन में सोने की गलती निकालूँगा ।’ मान लो, किसीको अधिक खाने की आदत है । नहीं जरूरत है फिर भी खाते रहते हैं । शरीर मोटा हो गया है । …तो नियम ले लो : ‘अब तुलसी के पत्ते रोज खाऊँगा… भोजन में अदरक का प्रयोग करूँगा ।’ वायु की तकलीफ है तो निर्णय करो : ‘आज से आलू मेरे लिए बंद ।’ इस प्रकार जिस कारण से रोग होता है ऐसी चीजों को लेना बंद कर दो । जिस कारण से चटोरापन होता है वे चीजें दूसरों को दे दो और निर्णय करो कि : ‘आज से इतने दिनों तक इस दोष में नहीं गिरूँगा ।’ यदि काम और लोभ का दोष है तो निर्णय करो कि : ‘आज से इतने दिनों तक काम में नहीं गिरूँगा… लोभ में नहीं गिरूँगा…’ इस प्रकार जो भी बुरी आदत है या विकार है, कुछ दिनों तक ऐसा कुछ नियम ले लो जो उसके विपरीत भावों का हो । मान लो, आपका चिड़चिड़ा स्वभाव है, क्रोधी स्वभाव है तो ‘राम… राम… राम…’ रटन करके हास्य करो और निर्णय करो कि : ‘आज से इतने दिनों तक मैं प्रसन्न रहूँगा ।’ चिंता में डूबने की आदत है तो दृढ़ भावना करो कि : ‘मैं निश्चिन्त नारायण का हूँ… ॐ शांति… शांति…’ दस मिनट तक यह भावना दुहराओ । इस प्रकार की कोई भी कमजोरी हो, सिगरेट-शराब की या दूसरी कोई हो… इस प्रकार के अलग-अलग दोषों को निवृत्त करने के लिए त्रिबंध प्राणायाम आदि अलग-अलग प्रयोग ‘ध्यान योग शिविर’ में कराये जाते हैं । इससे आप अपनी पुरानी बुरी आदत और कमजोरी को निकालने में सफल हो सकते हो । आपका शरीर फुर्तीला रहेगा, मन पवित्र होने लगेगा और ध्यान-भजन में बरकत आयेगी ।
त्रिबंध प्राणायाम शुद्ध हवामान में करना चाहिए, सात्त्विक वातावरण में करना चाहिए । ध्यानयोग शिविर में कई प्रयोग सिखाये जाते हैं । हफ्ते में एकाध दिन मौन रहो । हो सके तो संध्या को सूर्यास्त के बाद या रात्रि के भोजन के बाद मौन रहने का संकल्प कर लो कि : ‘सूर्योदय से पहले अथवा नियम होने तक किसीसे बात नहीं करेंगे ।’ इससे आपकी काफी शक्ति बच जायेगी एवं आप जिस क्षेत्र में हैं वहाँ भी वह शक्ति काम करेगी । इस मौन को यदि आप परमात्मप्राप्ति में लगाना चाहो तो साथ में अजपाजाप का भी प्रयोग करो । सुबह नींद से उठने के बाद थोड़ी देर शांत होकर बैठो एवं विचार करो कि : ‘हो-होकर क्या होगा ? बड़े शर्म की बात है कि मनुष्य जन्म पाकर भी जरा-जरा-सी बात में दुःखी, भयभीत एवं चिंतित होता हूँ । दुःख, चिन्ता एवं भय में तो वे रहें जिनके माई-बाप मर गये हों और जो निगुरे हों । हमारे माई-बाप तो हमारा आत्मा-परमात्मा है और गुरु का ज्ञान मेरे साथ है । हरि ॐ… हरि ॐ… राम… राम… अब हम प्रयत्न करेंगे लेकिन चिंता नहीं करेंगे…’ आदि-आदि । सुबह ऐसा संकल्प करो फिर देखो कि आप कहाँ-से-कहाँ पहुँच जाते हो । 
जप तीन प्रकार से कर सकते हैं : ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत । ‘हरिॐ-हरिॐ-हरिॐ-हरिॐ-हरिॐ…’ यह है ह्रस्व जप । ‘हरि… ॐ… हरि… ॐ… हरि… ॐ… हरि… ॐ… हरि… ॐ…’ यह है दीर्घ जप । 
‘ह…रि…ॐ… ह…रि…ॐ… ह…रि…ॐ… ह…रि…ॐ… ह…रि…ॐ…’ यह है प्लुत जप । 
रात्रि को सोते समय इन तीनों प्रकार से दस मिनट तक ‘हरि ॐ…’ मंत्र का जप करके सो जाओ । इस प्रकार के जप से आपको तन, मन एवं बुद्धि में कुछ विशेष परिवर्तन का अनुभव होगा । यदि प्रतिदिन इसका नियम बना लो तो आपकी तो बंदगी बन जायेगी और साथ ही आपके अचेतन मन में भी भारी लाभ होने लगेगा । 
इस प्रकार नियमित रूप से किये गये त्रिबंध प्राणायाम, मौन, जप एवं ध्यान की साधना आपके जीवन में चार चाँद लगा देंगे ।

About Asaram Bapuji

Asumal Sirumalani Harpalani, known as Asaram Bapu, Asharam Bapu, Bapuji, and Jogi by his followers, is a religious leader in India. Starting to come in the limelight in the early 1970s, he gradually established over 400 ashrams in India and abroad.