हरी ओम प्रभु

श्री कृष्णजी का स्वधाम-गमन (हाय संसार तेरी नश्वरता – हाय मनुष्य तेरी आसक्ति)
🔹तात्विक सत्संग संत श्री आसारामजी बापू ।

🔹सत्संग के मुख्य अंश:

🔹हाय संसार तेरी नश्वरता – हाय मनुष्य तेरी आसक्ति हाय संसार तेरी पीड़ा देने की आदत हाय इंसान तरी भोगों में रुचि

🔹क्या बीती होगी उस योद्धा पर जो केशव कदम कदम पर मार्गदर्शन करते थे अब वे ही नही रहे ।

🔹हाय रे संसार तेरा पीड़ा देना का स्वभाव श्री कृष्ण जी को बी नही छोड़ा ।

🔹 कब तक शरीर को मकानों को संभालोगे आप अभी से संभालो जिसको संभालना है ।

🔹चलते फिरते उठते बैठते उसका स्मरण ओर एकांत में उसकी शांती में खोना सीखो ।

🔹हमारा बी जी चाहता है ऐसी जगह जाए जहां कोई पहचाने नही अब देखे कैसा करते है भगवान ज्ञात हो अज्ञातवास हो जैसे उसकी मर्जी ।

🔹कब तक लाइन लगाओगे कब तक प्रसाद लोगे दोगे छोड़ो ये सब प्रवुर्ति को घटाते जाओ ।