Albele Santon Ki Leela ( अलबेले संतों की लीला )

albele sant
अलबेले संतों की लीला

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी

सत्संग के मुख्य अंश :

* ६० हज़ार वर्ष तपस्या किया अगर आत्मा में नहीं टिका तो बेकार हैं इसलिए आत्मा में टिकना जरुरी है

* पूरे हैं वो मर्द जो हर हाल में खुश हैं, मिला अगर माल तो उस माल में खुश हैं, हो गए बेहाल तो उसी हाल में खुश हैं |

* कभी चबावे चना चबैना, कभी लपटा ले खीरा दीं, वाह रे मौज फकीरा दीं
कभी तो ओढ़े शाल दुशाले, कभी गुदड़िया लीला दीं, वाह रे मौज फकीरा दीं
मंग तंग के टुकड़े खावें |

* देने के लिए कुछ भी नहीं होता संतो के पास पर पल भर में सम्राट बना देते हैं |

* एक ब्राह्मण का बच्चा दुर्वाशा ऋषि को बिना प्रणाम किये जा रहा था तो उन्होंने देवी के वरदान को भी कैंसल कर दिया |

* अगस्त्य ऋषि को भगवान श्री कृष्ण ने विश्व रूप दिखाया तो ऋषि जी ने कहा चलो मैं तुम्हे दिखाता हूँ, अर्जुन तुमसे प्रभावित हो जायेगा मैं थोड़े ही प्रभावित होऊंगा ऐसे महापुरुषों को पहचानना दुर्लभ है|

“ब्रह्मज्ञानी की मत कौन बखाने, नानक, ब्रह्मज्ञानी की गत ब्रह्मज्ञानी जाने
ब्रह्मज्ञानी मुगत-जुगत का दाता, ब्रह्मज्ञानी पूर्ण पुरुष विधाता”

* काशी के एक सेठ को संतान नहीं हो रहा था तो वो तुलसीदास जी के पास गये, तुलसीदास जी ने सरकार (भगवान राम जी) से पूछा तो उन्होंने कहा – १०जन्म तक संतान नहीं है

* सेठ दुखी हो गया तो एक दूधवाले ने उनको संत किन्नाराम जी के पास भेजा और संत ने उन्हें अपनी तरफ से १० बच्चो का वरदान दे दिया |

* साईं लीलाशाह जी के पास एक गरीब आया उसकी आँखे खराब हो गयी थी साईं जी ने उसे आंकड़े के पत्ते आँख में डालने के लिए बोले और उसकी आँखे ठीक हो गयी| ऐसी होती हैं संतों की महिमा |