अनंत ब्रह्मांड में आत्मवेता रमता है

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इस सत्संग के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं :

१. ज्ञान में आनंद है |
२. तीन प्रकार के आकाश |
३. वास्तव में सब वासुदेव ही हैं |
४. जैसा मान वैसा अपमाना |
५. कई अनुभूतियों वालो के प्रसंग |
६. हनुमानजी के मोतियों के हार में प्रभु को ना पाकर तोड़-तोड़कर फेकने का प्रसंग |
७. आशारामायण का अंश पाठ |
८. कई परमहँसो के प्रसंग |
९. मच्छेन्द्र नाथ जोगी की कथा |
१०. अनंत ब्रह्मांड में आत्मवेता रमता है |
११. आकाश गंगा में ४०० सूरज हैं |
१२. जन-विजय की कथा में अविश्वास की कथा |
१३. परमात्मा में सदा वर्तमान है |
१४. महापुरुषों के संकल्प में बहुत बल होता है |
१५. आत्मसाक्षात्कार का महत्व |
१६. ध्यान-भजन में १० गुना फायदा हो ऐसा प्रयोग
१७. भगवान की शरण में होने से भगवान की माया से बचाव हो जाता है |
१८. संस्कृति और सभ्यता में अंतर |
१९. कुम्भ कब कहाँ होता है |