Author Archives: Nakul Taunk

दशहरा का सही अर्थ क्या ?

भगवान राम की रावण पर विजय प्राप्त करने का अर्थ है विजयादशमी

भगवान श्री राम और रावण दोनों ही शिव भक्त थे

भगवान राम और रावण दोनों ही ज्ञानी बलशाली महा प्रतापी और बुद्धिमान थे

रावण शरीर को मैं मानकर और संसार को मेरा मानकर सुखी होना चाहता था

भगवान राम आत्मा को मैं मान कर अपने चित में विश्रांति पाते थे

रावण के स्वभाव से बचो भगवान राम का स्वभाव अपनाओ

भगवान रावण की जीवन में सात्विकता की और रावण के जीवन में तमस और रजस था

जीवन में भगवान राम का मार्ग अपनाना है ना कि रावण का

10 इंद्रियों को नियंत्रित करके अपने अंतर आत्मा राम का सुख पाओ

बाहर की चीजों में सुख खोजना बंद करो

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देवी की उपासना 9 रात्रियों की ही क्यों की जाती है ?

नवरात्रि के 9 शुभ दिन

भगवान राम, माता सीता और नवरात्रि से जुड़ा हुआ 9 का आंकड़ा है

9 की अपनी विशेषता

पूरे ब्रह्मांड और उसके जीव जंतुओं को सत्ता देने वाला वही परमपिता परमेश्वर

सत्संग से ही परम लाभ

मैं मन, बुद्धि, इंद्रिय, शरीर, संसार सब कुछ बदलता है

संतो का संग करें

ईश्वर की भक्ति बढ़ाओ

भगवान के गुणगान करें

सहज स्वभाव से भक्ति करें

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ॐ कार उपासना की महिमा

ओंकार की उपासना बहुत लाभ देगी

प्राणायाम से जीवनी शक्ति का विकास होता है

अंतर्यामी परमेश्वर ओमकार मंत्र के देवता

भगवान नारायण ने खोजा ओमकार मंत्र को

ओंकार की छंद गायत्री है

ओमकार मंत्र के जप से जीवन में सफलता

ओमकार मंत्र व्यापक ब्रह्म परमात्मा से एकाकार कराता है

ओमकार मंत्र के जप से तीव्र वैराग्य होगा

ओमकार मंत्र के जप से सारे दुखों का अंत

संत और सत्संग से परम लाभ

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साधकों के दिव्य संकल्प से ही बहुत बड़ा परिवर्तन हो जाएगा

संतों और महापुरुषों का कोई नुकसान नहीं कर सकता

भारतीय सनातन संस्कृति हमेशा अटल रहेगी

संतो को मिटा सके यह दुर्जनओं में दम नहीं

सज्जनों को दुष्टों का विरोध करना चाहिए

संतो और महापुरुष को मिटा सके यह जमाने में दम नहीं संतो से जमाना है जमाने से संत नहीं

भगवान बुद्ध जीसस क्राइस्ट सुकरात मनसूर का हुआ था समाज में बहुत विरोध

संतों की निंदा को का विनाश तय

भगवान बुद्ध की कथा

संकल्प में बहुत शक्ति

गुरु के सत्संग को समाज में पहला और गुरु भाइयों की संख्या बढ़ाओ

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उमा राम सुभाउ जेहिं जाना

संसार नाशवान है

भूलकर भी उन खुशियों से ना खेलना जिनके पीछे हो गम की कतारें

भगवान शिव जी के वचन

जगत के स्वभाव को जानोगे तो आपको वैराग्य आएगा

भगवान के स्वभाव को जानोगे तो आपको प्रीति हो जाएगी

संसार दुख देने वाला है

शरीर को मैं मानना ही सबसे बड़ी भूल

किसी की निंदा ना करो

मौत को मोक्ष में बदलने की कला सीख लो

भगवान हमेशा हाजरा हजूर

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शास्त्रों और संतों का संग

वशिष्ठ जी ने दिया भगवान राम को सत्संग

संतो का संग नहीं किया तो विनाश पक्का

पुरुषार्थ से संपदा आती है

संयम से संपदा टिकती है

परोपकार से यश बढ़ता है

मन और इंद्रियों को शास्त्रों और संतों के अनुसार रखना

संतों और शास्त्रों के संग से राग द्वेष का नाश होता है

संसार नाशवान है

इच्छा और वासना ही जन्म और मरण का कारण

हमेशा आनंद में रहो

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प्रभु तेरी मर्जी पूर्ण हो

अपनी इच्छा पूरी हुई तो सुख का उपभोग करके मनुष्य पतन की ओर अग्रसर होता है

इच्छापूर्ति हुई तो सुख को बांट दो

इच्छा पूर्ति के सुख का सदुपयोग करो

सभी इच्छाएं किसी की पूरी नहीं होती

अनावश्यक इच्छाओं को मन से निकाल दो

मन को एकाग्र करो

अंतर्यामी मधुमेह परमेश्वर को पाओ

आत्मसाक्षात्कार ही सारे दुखों की निवृति का एकमात्र उपाय

इंद्रियों का दास ना बनो

जीवन में सत्संग बहुत जरूरी है

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मधुमय प्रसंग

मधुमय आत्मा को मधुरता चाहिए

भगवान की सारी सृष्टि मधुमय है

मधुमय का मजा लो

ईश्वर का मधुमय पिलाओ

ईश्वर से प्रीति करो

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परमात्मा का माधुर्य

सदैव प्रसन्न चित्त रहना चाहिए

सभी मनुष्यों में मधुरता

पूरे ब्रह्मांड में मधुमेह परमात्मा

मधुमेह सृष्टि द्वेष से विश्व मई हो जाती है

सत गुरु ही ब्रह्मा विष्णु और महेश है

इच्छापूर्ति से संसार में फसने वाला सुख

मन एकाग्र करो

सब छूट जाएगा

संसार नाशवान है

सारे सुख भोग के पीछे दुख और वियोग हैं

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आत्मसाक्षात्कार कठिन क्यों लगता है ? | आत्मसाक्षात्कार दिवस विशेष सत्संग

नासमझी के कारण ईश्वर प्राप्ति कठिन लग रही है

ईश्वर प्राप्ति बहुत सरल है और कठिन नहीं

वशिष्ठ जी ने दिया भगवान श्री राम को सत्संग

राग और द्वेष के कारण ईश्वर प्राप्ति कठिन

भगवान बहुत सुलभ है

राजा जनक और राजा परीक्षित को हुआ था आत्म साक्षात्कार

अपने में खो जाऊं तो तुरंत आत्म साक्षात्कार

आत्म सुख से बड़ा कोई सुख नहीं

आत्म साक्षात्कार करना शहंशाह का रास्ता

घाट वाले बाबा का प्रसंग

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