बड़े भाई – (बापूजी की लीला-४)

IMG-20140124-WA0004बड़े भाई

तकदीर ये कैसा डोह करें | हे मुक्कदर … चाणक्यजी कहते है : हे विधाता तू मेरा सबकुछ छीनकर ले लो | एक टाइम की रोटी छिना चाहे तो छीन लों | चीज वस्तुएं छिनना चाहते है तो छीन लों | लेकिन मेरी सद्बुद्धि मत छीन लों | जो पात्र नहीं होते ना उनके पास सद्बुद्धि भी नहीं होती | और सद्बुद्धि नहीं होती तो सान्निध्य से उन्हें अजीर्ण हो जाते | गुरु सान्निध्य का महत्त्व भी नहीं जानते | हरि ॐ … ॐ … नारायण….
इसने मेरे भाई का नाम लिया | मेरा बड़ा भाई मैं चाहता था की उसको थोडा रंग लगे | मैं हरिद्वार में था और मैंने उनको बुलाया था | वो बिचारा सक्कर बेच बेच के भिक रहा है उसका भला हो | मैंने कैसे भी युक्ति करके उसको बुलाया बहुत जरूरी काम है | तुम्हारा लाभ होगा, ये होगा | मैंने अपना उसकी नस जानके उसको मैंने तो बुला तो लिया हरिद्वार | मेरे से बड़ा था, हाँ बोले हाँ भाई बुला तो लिया अब क्या काम है ? मैंने कहाँ अब तुम थोडा दिन रहो ये घाटवाले बाबा बहुत ऊँचे कोटि के संत है | मैं कैसे बोलू की आप ऊँचे कोटि के संत हूँ | तो मैं नहीं बोल सकता | घाटवाले बाबा और गंगाजी का किनारा | मेरा भाई क्या बोलता अरे पानी के घूँट को देखने के लिए मेरे को ईधर बुला लिया, ये संत को देखने के लिए | हम तो दुकान और घर छोड़ के आये ईधर तो पानी गंगा जल का इसलिए मेरे को बुलाया | आरे यार तू भी क्या ? उससमय तू तू करता था लेकिन अब जब ईधर आश्रम हुआ और लोग आने लगे तब उसकी थोड़ी बहुत दिमाग | फिर भी गुरु-बीरू नहीं मानता, आज्ञा नहीं मानता | लालजी महाराज के प्रति उसकी श्रद्धा बनाई | लालजी महाराज को थोडा गुरु-बीरू मानो कुछ तो करों | थोडा बहुत माना तो थोडा बहुत बदला | नहीं तो स्वभावदर था मेरे माँ का बेटा था | मेरा सगा भाई था | लेकिन तुलसी पूर्व के पाप से हरि चर्चा न सोहाय | जैसे तुम अपने घर में साधन भजन करते हो | लेकिन जरूरी नहीं की तुम्हारा भाई, तुम्हारी पत्नी, तुम्हारे परिवारवाले तुम् चाहो ऐसे हो जावो ऐसे कुछ जरुरी नहीं होता | कई लोग ऐसी पीड़ा पैदा कर देते है | हम तो आते है लेकिन हमारे घरवाले नहीं मानते | नहीं माने तो नहीं माने तू परेशान क्यों होता है ? मेरा पति आपको माने, मेरी पत्नी आपको माने | आरे भाई माने तेरी भावना उनके लिए अच्छी है लेकिन दुःख मत पैदा कर, परेशान मत पैदा कर | तो दु:खी होकर कोशिस करेगा तो नहीं भगवान की अपने तरफ से कोशिस करों दुःख मत करो | दुःखत्मा का स्वभाव नहीं, बेवकूफी का |

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