बाल्य अवस्था में गजब यादशक्ति – (बापूजी की लीला – २)

1बाल्य अवस्था में गजब यादशक्ति

हमारा भाई तीसरी की चौथी क्लास में था | तो भाई के साथ छोटा भाई लेह के वश चले गये | तो भाई को कमी याद करने को मिली थी | वो शेठ का बेटा याद नहीं किया | तो सभी विद्यार्थियों को मारपिट पड़ती तो फिर उसका वार आया | तो फिर आसुमल नाम के लड़के ने कहा की मेरे भाई को मत मारो मेरे भाई ओ | बोले ! तू बता दे कविता.. तो कविता चल पड़ी –
पाठ करी जो रात को जो घड़े पारसी गायो |
जो गुरुकुलो के धार जो सांई आयो |
साधक साधिक जी कमाई आयो |
बीज लखे जो बोलायो बेर टगे बाड |
बेर तंजे बाजारा कयो मुयट कभी ….
तो मास्तर और पूरा स्कुल बेराणीगाँव चकीत हो गया की इतना सा नन्हा छोकरा चौथी परीक्षा वालों के साथ भाई के साथ आया और भाई को मार पड़ती तो कविता कैसे बोल दिया | हालाकि कविता किसीने सुनाई थी पहिले, याद रह गया | तो ये अगले जनम की साधना कीई हो तो बचपन में ही अगले जनम के संस्कार जागृत हो जाते है |
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