बापूजी माताजी पर प्रसन्न – (बापूजी की लीला- ८)

mataji22बापूजी माताजी पर प्रसन्न

नारायण की माँ जवान थी और हम भी उससमय स्मार्ट थे | और वो मेरे कमरे आयी तो मैंने उसको समझाया की जबतक ईश्वर नहीं मिलेंगे तबतक मुझे इस झंजट में नहीं पड़ना है | बोली मैं भी चाहती हूँ लेकिन मेरी माँ ने, मेरे भाभी ने, मेरे भाई ने मेरे को खुप समझाया की ये हाथ से चला जायेगा, साधू बन जायेगा | इसलिए इसको संसार में अभी तुम्हारी माँ, भाभी पीछे लगी थी तू बुद्धू है चला जायेगा फिर तू ऐसा बोलते इसलिए मैं , मैं कहाँ मैं तुम्हारे सच्चाई का स्वागत करता हूँ | इसके शिवाय कुछ मांगों | तो बोले मुझे पिक्चर दिखा दो | भाई ने बताया तो बेचारी को | बोला कौनसी पिक्चर ? बोली ‘बोल राधा बोल संगम होगा की नहीं’ | पिक्चर का नाम मुझे याद है, मैं बोला इतवार को जायेंगे | तो इतवार को वो दुल्हन बनी थी वो साडी, गहने पहेनकर तैयार हो गई | और मेरा तो लेहंगा और कुर्ता, मैं तो उसके सामने चपराशी जैसा लग रहा था | आगे मैं उन्हें सत्संग सभा में ले गया | वहाँ ले गया वहाँ मेरा मित्र सत्संग में था हरगोबिन्द पंजाबी | मेरे से ज्यादा उमर वाला | उसकी पत्नी भी बड़ी साजरी हुई थी | मैंने मित्र से कहा की मेरी पत्नी तुम्हारी पत्नी से बातचीत करें, उन्हें अपनी सखी बना लें | तो मेरे उपर का दबाव कम हो जायेगा | युक्ति तो भगवान देते है प्रेरणा देते है | उस पंजाबी ने अपनी पत्नी को बोल दिया और उसने बड़ा स्नेह कर दिया | उसके बाद नारायण की माँ ने कभी नहीं सोचा की ‘बोल राधा बोल संगम होगा की नहीं’ | नहीं होगा, पिक्चर को कभी नहीं बेचारी | इस बात पर मैं खुश हूँ | जब नारायण की मँगनी की बात हो गई थी तो मैंने किसी साधारण परिवार की हो | जिनके घरों में दस दस करोड़ों के हीरे है ऐसे लोकों ने मुझे ऑफ़र दिया नारायण के लिए | कृष्णानी करके सरकारी हवालदार थे वे साधे-सुधे थे | अभी वे भोपाल आश्रम के संचालक है | मैं कहा ये सेवाभावी गंगा है उसकी कन्या मैंने नारायण के लिए चुना | उसका मुँह पड गया | बापू हमारी कन्या ! मैंने कहाँ हाँ फिर उन्होंने कहाँ मँगनी में क्या देना चाहिए ? मैंने कहाँ कुछ भी नहीं | आखिर वो बोले मँगनी हो गई तो कुछ तो लेना चाहिए | तो नारायण की माँ ने बोला की आपको देना ही है तो दो किलो मिठाई ले आओ और ये मेरी बच्ची हो | नारायण की बहु मेरी बच्ची हो | ये बात सुनकर मैं उनपर और खुश हो गया | और मैंने उसे मंच पर बुलाया आओ आओ हाथ मिलाओ आज बड़ी प्रसन्नता मिली | खुश …अभी भी खुश … जैसा मेरा सिद्धांत है उसने बेचारी ने सहयोग दिया |

Listen Audio:
Download Audio