बापूजी ने भगवान से पंगा लिया – (बापूजी की लीला- ९)

13बापूजी ने भगवान से पंगा लिया

मैंने भगवान से एक बार पंगा ले लिया | ईश्वर के तडफता है और अभीतक तुम नहीं मिले हो क्या है ? एक बार तो मील जाओ फिर महाराज तुम्हे ऐसा सस्ता बना दूंगा, ऐसा सस्ता बनाऊंगा जैसे फुटपाथी सब्जी की हालत होती है ऐसी हालत कर दूँगा | मैंने भी दम मारा | ईश्वर को दम मारा तो अटलजी को मार दिया तो उनको भी मार रहा हूँ | तुम एक बार मील जाओ फिर तुम्हे ऐसा सस्ता बनाऊंगा जैसे फुटपाथी सब्जीओं को हाल होता है | सुबह १०-१५ रूपये पालक की और मेथी की सब्जी दोपहर को ले लो ६ रूपये , ७ रूपये, पाँच रूपये | शाम को बोलते है २ रूपये की ५०० चलो | ऐसी हालत करूँगा महाराज ! फिर एक बार मील जाओ | और महाराज ! मील तो गये और महाराज की हालत भी ऐसी कर दीई मैंने | कोई भी आ जाय दीक्षा ले जाय | कोई चीज, वस्तु नहीं चाहिए ले जाना दीक्षा, ऊपर से सरबत भी पी जाओ | सरबत नहीं तो अंगूर खा जा, अंगूर नहीं तो आज खीर बनाई है रात को खीर खा लें, ये खा लें | आ जा ले जा, ले जा … और भगवान भी इस थंगे से राजी है | क्योंकि सजयुग में सभी की चाहना होती थी की ईश्वर को पाये बीना सब धोका है | कलयुग में ऐसी बुद्धि मारी गयी की ईश्वर ही कही रह गया सबकुछ पॉवर छोड़ के मरो | कौनसा क्या ले जायेगा ? कौनसी डिग्री ले जायेगा ? पहिलवान भी पहिलवाणी ले जायेगा | लहामा पहलवान भी बिचारा मक्खी उड़ाने में असमर्थ था | पहलवानी भी कब तक ? धन भी कब तक ? शरीर कब तक ? तो कॉलेज ने ५ हजार विद्यार्थी अथवा २ हजार विद्यार्थिओं की सीटें है | अगर ५०० अर्जी आती है तो ? जो आया भर्ती करेंगे | लेकिन २ हजार सीटें और ५ हजार फॉर्म आये है तो ? सिलेक्शन करोंगे, अच्छे-अच्छे विद्यार्थी भरोगे | तो कलजुग में भगवान की प्राप्ति की ग्राहकी बहुत बन गई | और मेरे भगवान को सस्ता कर दिया | भगवान भी राजी है चलने दो | तो आपका बहोत फायदा हो रहा है | अब मुझे इस बात का बड़ा आनंद है | पहिले से मैं दिन-दूना रात-चौड़ा जवान होते जा हूँ, की मेरे साधको को देखता हूँ और अपनी अपनी जगाह पर सब उनके शिष्य है, चले है जो भी भक्त है सब ठीक है अच्छा है | निंदा किसीकी हम नहीं करते | लेकिन मेरे साधक दीक्षा लेने के बाद जो ४-५ हप्ते जहाँ पहुँच जाते है ना वो पाँच साल वाले भी देखते रह जाते मेरे साधक इतने तेज रह जाते | मेरे साधक को हार्ट अटैक नहीं हो सकता मंत्र दीक्षा के बाद, अगर मेरा आशिर्वाद मंत्र लेता होता तो | और सभी को देने लगते हो तो हाय बी.पी नहीं हो सकता, लो बी.पी नहीं हो सकता, अगर है तो जप करें भाग जायेगा | पति-पत्नी के झगड़े नहीं हो सकते है तो भाग जायेंगे | पीलियाँ नहीं हो सकता, लिव्हर ख़राब नहीं हो सकता, अगर ख़राब लिव्हर हो सकता है तो डॉक्टर लोग २६ लाख लेते है | पहिले तो २० लेते थे | अभी २६ लाख रेट है | और कुटुम्बीयाँ का लिव्हर और बंधू का लिव्हर काट के अपने अंदर भरते | तो कुटुम्बीयाँ लिव्हर में जान गड़बड़ आती है | और अपनी भी कुदरती लिव्हर जैसी नहीं रहती | आप कहाँ तो ट्रक और कहाँ मारुती व्हान की इंजिन ट्रक के फिट करो बन्दर जरासा लिव्हर फिट करों | अथवा कुटुम्बी की २० % लिव्हर घालो | तो १००% का लिव्हर २०% नहीं काम करेंगी | तो २६ लाख खर्चा करनेसे भी वो फायदा नहीं होता जो दिक्षावालों को मैं आशिर्वाद मंत्र देता हूँ, एक दिन में ये फायदा हो जाता है | शनिदेवता का ग्रह हा कुप्रभाव मेरे शिष्य को नहीं पकड़ेगा | की शनिदेवता ब्रहस्पति के शिष्य है | और मेरा शिष्य भी बापू का शिष्य है | तो गुरु गुरु का आपस में मेल होता है तो हमारा कोलोब्रेशन है |

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