भगवान

bhagwan

Bhagwan

श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शांतिमचिरेणाधिगच्छति।।
‘जितेन्द्रिय, साधनपरायण और श्रद्धावान् मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के, तत्काल ही भगवत्प्राप्ति रूप परम शांति को प्राप्त हो जाता है।’
(भगवदगीताः 4.31)
भगवान श्रीकृष्ण यहाँ जो ज्ञान कहते हैं वह परमात्म-तत्त्व के ज्ञान से सम्बन्धित है। एक होता है ऐहिक ज्ञान और दूसरा होता है वास्तविक ज्ञान। वास्तविक ज्ञान की सत्ता से ही ऐहिक ज्ञान की गाड़ी चलती है। वास्तविक शुद्ध ज्ञान की सत्ता लेकर ही हमारी इन्द्रियाँ, हमारा मन सब अलग-अलग दिखाकर, भेद की कल्पना करके व्यवहार करते हैं। जब तक यह जीव वास्तिवक ज्ञान में टिकता नहीं तब तक उसे परम शांति नहीं मिलती। जब तक परम शांति नहीं मिली तब तक इस जीव के जन्म-मरण के दुःख, मुसीबतें और कष्ट का अन्त नहीं आता।
आधिदैविक शांति और आधिभौतिक शांति याने मानसिक शांति, ये शांतियाँ तो बेचारी कई बार आती हैं और चली जाती हैं। जब आत्मज्ञान होता है, आत्म-साक्षात्कार होता है तब आध्यात्मिक शांति, परम शांति का अनुभव होता है। एक बार परम शांति मिली तो वह जाती नहीं।
लब्ध्वा ज्ञानं परां शांतिम्…..।

About Asaram Bapuji

Asumal Sirumalani Harpalani, known as Asaram Bapu, Asharam Bapu, Bapuji, and Jogi by his followers, is a religious leader in India. Starting to come in the limelight in the early 1970s, he gradually established over 400 ashrams in India and abroad.