भाईदूज

 

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भाईदूज भाइयों की बहनों के लिए और बहनों की भाइयों के लिए सद्भावना बढाने का दिन है । एक-दूसरे की उन्नति के लिए शुभ-संकल्प करने का दिन है । ‘भविष्य पुराणङ्क में भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं : ‘‘राजन् ! कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि को यमुना ने अपने घर अपने भाई यम को भोजन कराया और यमलोक में बडा उत्सव हुआ, इसलिए इस तिथि का नाम ‘यमद्वितीयाङ्क है । अतः इस दिन भाई को अपने घर भोजन न कर बहन के घर जाकर प्रेमपूर्वक उसके हाथ का बना हुआ भोजन करना चाहिए । इससे बल और पुष्टि की वृद्धि होती है । इसके बदले बहन को स्वर्णालंकार, वस्त्र तथा द्रव्य आदि से संतुष्ट करना चाहिए । यदि अपनी सगी बहन न हो तो पिता के भाई की कन्या, मामा की पुत्री, मौसा अथवा बुआ की बेटी – ये भी बहन के समान हैं, इनके हाथ का बना भोजन करे । जो पुरुष यमद्वितीया को बहन के हाथ का भोजन करता है, उसे धन, यश, आयुष्य, धर्म, अर्थ और अपरिमित सुख की प्राप्ति होती है ।