बीमारी से युक्ति से मुक्ति -(बापूजी की लीला- १०)

sankalpबीमारी से युक्ति से मुक्ति

मेरे को गले का कैंसर हो गया था | मैंने कोई दवाई नहीं ली | भक्तोंको  पता चला तो ये कैबिन बना दी | धुल, धुवाँ, ये बोलना, लाखों आदमी आते तो पोलुशन, मैं तुलसी के पत्तों का रस लेने लग गया | जो ट्यूमर के छोटे – छोटे टुकड़े खाँसने में बाहर निकले, कैंसर ठीक हो गया | अपेंडिक्स हुआ था मेरे को तो मैं घर में था | पादपरशुं आसन किया दो साल तक मुझे अपेंडिक्स ने खुप सताया | अच्छे-अच्छे डॉक्टरों ने बताया ऑपरेशन करना पड़ेगा | मैं ऑपरेशन को फरहेज किया | गुरूजी के पास गया तो पादपरशुं आसन किया, अपेंडिक्स ठीक हो गया |
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