Brahmagyan Ki Unchi Baat ( ब्रह्मज्ञान की ऊँची बात )

smritimay Kirtan
* अपनी अपनी भावना से भगवान् की आकृति बनाने ये आरम्भिक साधना हैं | आखिरी तो ये है की भगवान की आकृतियाँ जिस से बनती हैं वो अकाल पुरुष सारी आकृतियाँ के अधिष्ठान वो रब ही रह जाते हैं ..
* दो वस्तुओं के मिश्रण का नाम संसार है, एक सच्चीदानंद और दूसरा माया इन दोनों के परस्पर अध्यास, अध्यायरूप इसी का नाम दुनियां है …
* बहुत पसारा मत करों कर थोड़े की आश अभूत पसारा जिन किया वो भी गये निराश …