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छत्रपति शिवाजी राजे का साहस

12 वर्षीय शिवाजी एक दिन बीजापुर के मुख्य मार्ग पर घूम रहे थे। वहाँ उन्होंने देखा कि एक कसाई गाय को खींचकर ले जा रहा है। गाय आगे नहीं जा रही थी किंतु कसाई उसे डंडे मार-मार कर जबरदस्ती घसीट रहा था। शिवाजी से यह दृश्य देखा न गया। बालक शिवाजी ने म्यान से तलवार निकाली और कसाई के पास पहुँच कर उसके जिस हाथ में रस्सी थी उस हाथ पर तलवार का ऐसा झटका दिया कि गाय स्वतंत्र हो गयी।

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सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण (For A Strong India)

महाकाल ने दिए पितरों के उद्धार के लिए सुंदर उपाय!!

इस घटना को लेकर वहाँ अच्छी खासी भीड़ इकट्ठी हो गई लेकिन वीर शिवाजी का रौद्र रुप देखकर किसी की आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई। इस घटना का समाचार जब दरबार में पहुँचा तो नवाब क्रोध से तिलमिला उठा और शिवाजी के पिता शहाजी के बोलाः “तुम्हारा बेटा बड़ा उपद्रवी जान पड़ता है। शहाजी ! तुम उसे तुरंत बीजापुर से बाहर भेज दो।”

शहाजी ने आज्ञा स्वीकार कर ली। शिवाजी को उनकी माता के पास भेज दिया गया। वे शिवाजी को बाल्यकाल से ही रामायण, महाभारत आदि की कथाएँ सुनाया करती थीं। साथ ही उन्हें शस्त्रविद्या का अभ्यास भी करवाती थीं। बचपन में ही शिवाजी ने तोरणा किला जीत लिया था। बाद में तो उनको ऐसी धाक जम गयी की सारे यवन उनके नाम से काँपते थे। वह दिन भी आया जब अपने राज्य से शिवाजी को निकालने वाले बीजापुर के नवाब ने उन्हें स्वतंत्र हिन्दू सम्राट के नाते अपने राज्य में निमंत्रित किया और जब शिवाजी हाथी पर बैठकर बीजापुर के मार्गों से होते हुए दरबार में पहुँचे, तब आगे जाकर उनका स्वागत किया और उनके सामने मस्तक झुकाया। कैसी थी शिवाजी की निर्भीकता ! कैसा गजब का था उनका साहस, आत्मविश्वास !

जहाजों से जो टकराये, उसे तुफान कहते हैं।

तूफानों से जो टकराये, उसे इन्सान कहते हैं।।

हमें रोक सके, ये जमाने में दम नहीं।

हमसे है जमाना, जमाने से हम नहीं।।

खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले।

खुदा बंदे से यह पूछे कि बता तेरी रजा क्या है।।

बाधाएँ कब रोक सकी हैं, आगे बढ़ने वालों को।

विपदाएँ कब रोक सकी हैं, पथ पे बढ़ने वालों को।।

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जोधपुर होस्पिटल में भी दिखा बापूजी का चमत्कार…..

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जी हाँ नागौर (राज.) के रहने वाले एक व्यक्ति का जब बापूजी को देखते ही बदल गया सारा जीवन नशे की लत तो छूटी पर शरीर की भयंकर बिमारियाँ भी निकल गयी ।

7 लाख रूपये खर्च कर चुका नशे में, केवल एक बार बापूजी के कह देने से नशा छूट गया ।
21 दिन तक लगातार खडा रहा नींद नहीं आती थी, बापूजी ने अपने हाथों से प्रसाद दिया और एक मंत्र जप करने को कहा दो चार घंटे में ही वो आदमी आराम की नींद सो गया ।
नागौर के रहने वाले पूर्ण कुमार जो लाखों रूपये नशे में खर्च कर चुके थे, नशे के कारण 21 दिन तक नींद नहीं आई जागता रहा सारी दुनीया सोती रही पर इनकी नींद उड गयी । घर नर्क बन चुका था अपने घर में अपनी घरवाली को नशे की हालत में पीटता था ।

बापूजी का आशिर्वाद मिला नशा तो छूटा घर परिवार में सुख शांति भी आयी । शरीर की बिमारीयाँ भी चली गयी ।

हुआ कुछ यूं के जोधपुर हास्पिटल में बापूजी को इलाज के लिए कई बार जाना पडा है पूज्य बापूजी के इलाज के लिए उन्हें होस्पिटल ले जाया जाता था वहाँ बहुत से ऐसे मरीज भी थे जिन्हें बापूजी से मिलने का मौका मिला इनमें ये पूर्ण कुमार भी थे जिन्हें 21 दिनों से लगातार नींद नहीं आ रही थी । और नशे की इतनी लत पड गयी थी कि नशे के बिना सारा शरीर लाचार हो जाता था । इन्हें होस्पिटल में बापूजी से बात करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । इन्होंने बापूजी को बताया मैं नशा करता हूँ मेरा घर बरबाद हो गया अब नशे की लत छोडना चाहता हूँ पर छूटती नहीं । बापूजी ने सहज में ही कहा कैसे नहीं छूटती मैं देखता हूँ । ये प्रसाद खा सब ठीक हो जायेगा । उस प्रसाद में जुडे संत महापुरुष बापूजी के आशिर्वाद ने जैसे पूर्ण सिंह की जिंदगी बदल दी । और नशा तो छूटा पर शरीर की सारी बिमारियाँ भी चली गयी । और ये के कुछ ही घंटों में जीवन की काया बदल गयी ।

पूर्ण सिंह जी कहते हैं बापूजी पर श्रद्धा ना रखने वाले आँख वाले अंधे हैं वो आज इतने बडे महान संत को पहचान नहीं पा रहे हैं । बापूजी साक्षात भगवान के अवतार हैं । मैं उनको प्रणाम करता हूँ । जब बापूजी हास्पिटल में आते थे तो वहाँ रहने वाले सभी मरीज कहा करते थे ये वो महान संत हैं इनके चरणों की धूल भी हमें छूने को मिल जाये तो हमारा जीवन बदल जायेगा । इन बाबाजी के चरणों में हमारा प्रणाम है । बापूजी तो वो संत हैं जो अपनी पीडा ना देखकर दूसरों की पीडा हरने में लग जाते हैं । प्रणाम है मेरा शत शत प्रणाम है बापूजी के चरणों में……

मैंने ये पंक्ति चरितार्थ होते देखी है —
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड पराई जाणे रे…..।
बापूजी के चरणों में मेरा शत शत नमन !

आज संत आशारामजी बापू को समझने में कमी रखने वाले आँख वाले अंधों को ये विडियो जरूर देखना चाहिए की जोधपुर में भी देखने को मिल रहे हैं संतों की कृपा के चमत्कार ।