Category Archives: Bapuji ki Leela

आध्यात्मिक सफर…जोगी की जीवनगाथा

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आध्यात्मिक सफर…जोगी की जीवनगाथा(Adhyatmik Safar….Yogi Ki Jeevangatha)

पर्वों के पुंज दीपावली के पावन अवसर पर महिला उत्थान मंडल की नवीन प्रस्तुति

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की जीवनी …एक अनोखे संगीतमय अंदाज में  आध्यात्मिक सफर….जोगी की जीवनगाथा

विमोचन के पश्चात् यह डी.वी.डी. सभी आश्रमों एवं सत्साहित्य केन्द्रोंमें उपलब्ध होगी ।
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श्री आशारामायण पाठ सेवा रायपुर में

श्री आशारामायण पाठ सेवा रायपुर में 

प्रत्येक रविवार व गुरुवार को विभिन्न जगहों  पर साधको के निवास स्थान पर मनोवांछित फल प्रदान प्रदान करने वाला श्री आशारामायण (योगलीला) का पाठ रायपुर आश्रम द्वारा किया जाता है,जिसमे दिनांक 5 मई का पाठ भांठागांव,रायपुर में हुवा |

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जोधपुर होस्पिटल में भी दिखा बापूजी का चमत्कार…..

g71जोधपुर होस्पिटल में भी दिखा बापूजी का चमत्कार…..
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जी हाँ नागौर (राज.) के रहने वाले एक व्यक्ति का जब बापूजी को देखते ही बदल गया सारा जीवन नशे की लत तो छूटी पर शरीर की भयंकर बिमारियाँ भी निकल गयी ।

7 लाख रूपये खर्च कर चुका नशे में, केवल एक बार बापूजी के कह देने से नशा छूट गया ।
21 दिन तक लगातार खडा रहा नींद नहीं आती थी, बापूजी ने अपने हाथों से प्रसाद दिया और एक मंत्र जप करने को कहा दो चार घंटे में ही वो आदमी आराम की नींद सो गया ।
नागौर के रहने वाले पूर्ण कुमार जो लाखों रूपये नशे में खर्च कर चुके थे, नशे के कारण 21 दिन तक नींद नहीं आई जागता रहा सारी दुनीया सोती रही पर इनकी नींद उड गयी । घर नर्क बन चुका था अपने घर में अपनी घरवाली को नशे की हालत में पीटता था ।

बापूजी का आशिर्वाद मिला नशा तो छूटा घर परिवार में सुख शांति भी आयी । शरीर की बिमारीयाँ भी चली गयी ।

हुआ कुछ यूं के जोधपुर हास्पिटल में बापूजी को इलाज के लिए कई बार जाना पडा है पूज्य बापूजी के इलाज के लिए उन्हें होस्पिटल ले जाया जाता था वहाँ बहुत से ऐसे मरीज भी थे जिन्हें बापूजी से मिलने का मौका मिला इनमें ये पूर्ण कुमार भी थे जिन्हें 21 दिनों से लगातार नींद नहीं आ रही थी । और नशे की इतनी लत पड गयी थी कि नशे के बिना सारा शरीर लाचार हो जाता था । इन्हें होस्पिटल में बापूजी से बात करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । इन्होंने बापूजी को बताया मैं नशा करता हूँ मेरा घर बरबाद हो गया अब नशे की लत छोडना चाहता हूँ पर छूटती नहीं । बापूजी ने सहज में ही कहा कैसे नहीं छूटती मैं देखता हूँ । ये प्रसाद खा सब ठीक हो जायेगा । उस प्रसाद में जुडे संत महापुरुष बापूजी के आशिर्वाद ने जैसे पूर्ण सिंह की जिंदगी बदल दी । और नशा तो छूटा पर शरीर की सारी बिमारियाँ भी चली गयी । और ये के कुछ ही घंटों में जीवन की काया बदल गयी ।

पूर्ण सिंह जी कहते हैं बापूजी पर श्रद्धा ना रखने वाले आँख वाले अंधे हैं वो आज इतने बडे महान संत को पहचान नहीं पा रहे हैं । बापूजी साक्षात भगवान के अवतार हैं । मैं उनको प्रणाम करता हूँ । जब बापूजी हास्पिटल में आते थे तो वहाँ रहने वाले सभी मरीज कहा करते थे ये वो महान संत हैं इनके चरणों की धूल भी हमें छूने को मिल जाये तो हमारा जीवन बदल जायेगा । इन बाबाजी के चरणों में हमारा प्रणाम है । बापूजी तो वो संत हैं जो अपनी पीडा ना देखकर दूसरों की पीडा हरने में लग जाते हैं । प्रणाम है मेरा शत शत प्रणाम है बापूजी के चरणों में……

मैंने ये पंक्ति चरितार्थ होते देखी है —
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड पराई जाणे रे…..।
बापूजी के चरणों में मेरा शत शत नमन !

आज संत आशारामजी बापू को समझने में कमी रखने वाले आँख वाले अंधों को ये विडियो जरूर देखना चाहिए की जोधपुर में भी देखने को मिल रहे हैं संतों की कृपा के चमत्कार ।

ज्ञानवर्धक बचपन की लीला – (बापूजी की लीला- २४)

Guruji1ज्ञानवर्धक बचपन की लीला

नहीं बदलता वही तो है, बचपन बदल गया, बचपन की बेवकूफी बदल गयी | छोटी-छोटी सहेलियाँ थी गुड्डी-गुड्डीयाँ खेलते थे मित्र थे सब बदल गया | लेकिन मैंने गुड्डे-गुड्डी की बरात बनाई थी, बचपन में | और मेरे तरफ से तो गुड्डा था और विपक्ष के तरफ से गुड्डीयाँ थी | अब लोक गुड्डे-गुड्डी वाले हम बरात लेके गये | और फिर बैंड भी मैंने बजाई थी | पी…पी.. पी.. पी.. बच्चे थे | और गुड्डे-गुड्डी की शादी-बादी हो गई, जो कुछ खाना-पीना बनाया था वो भी प्लेट किया | फिर गुड्डी को लें आये हम | तो गुड्डी, गुड्डे के साथ ही रहेगी | मैं तो थोडा मुखियाँ रहेता था, छोटा-छोटा बच्चे थे, ५ – ७ साल के होंगे | तो गुड्डा और गुड्डी आखिर मेरे घर रहे | तो मेरा स्वभाव छान-बीन का था | तो जो गुड्डा बनके लाया था और जो गुड्डी जिन्होंने बनाई थी मैंने देखा की क्या है इसीमें, दिखने में तो साटिन था, क्रेप था लेकिन वो हटाया तो अंदर छी .. छी…. पुराणी लिठियाँ | बाहर की मख्खी अंदर बुरबुर द्ख्खी |

ऐसे ये संसार गुड्डे-गुड्डीयाँ है | बाहर से मेकअप किया फिर दुल्हन बन गयी, दूल्हा बन गया | लेकिन नाक उपर करके देखो तो मुँह से बदबू आती है, नाक से लीप निकलती है, आँखोंसे खुरेल निकलती है, रोमकूप से पसीना निकलता है गन्दा, स्वासोस्वास से गंदी हवा निकलती है, कान से कड़ी कड़ी पित्तजन्य चीज निकलती है | मच्छर आपके कान के पास आके गाना गाते है तो आपको काट रहे ऐसा नहीं आपके कान से जो मैल निकलता है वो पित्त और उसकी अपनी बू होती है तो उनको मजा आता है | वो सुंगधी लेने को तुम्हारे कान के आगे आते ऐसा नहीं की तुम्हारे को सुनाते है की मैं काटने आ रहा हूँ | ऐसा ज्ञान होता है सत्संग में नहीं तुमको पता भी नहीं, की मच्छर क्यँ आते है कान के आगे | कान में पित्त के गंदगी निकलती है तो मच्छरों को मजा आती है |

तो ये संसार सारा जो भी भोग वासना है वो ना समझी से सुख बुद्दी लगती है, हैं कुछ भी नहीं |
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