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Chaitnya Maha Prabhu Jayanti -23rd March 2016 – Pujya Asharamji Bapu

chaitanaya Mahaprabhu jayanti

सत्संग के मुख्य अंश :

* अपने ईश को जानना ही न्याय है बाकि सब अन्याय है।

* संसार तापे तप्तानाम योगो परम औषध: । संसार के तापों में तपने वाले व्यक्ति के लिए भगवद योग ही परम औषध है ।

* इन्द्रियों का सार मन है, मन का सार मति है, मति का सार चिदावली है, चिदावली का सार चैतन्य है–ये जानना न्याय है बाकि सब अन्याय है।

*पृथ्वी का आधार जल है ,जल का आधार तेज है,तेज का आधार वायु है,वायु का आधार आकाश है,आकाश का आधार महतत्त्व है,महतत्त्व का आधार प्रकृति है,प्रकृति का आधार रोम -रोम में रमने वाला चैतन्य है–इस को जानना ही न्याय है बाकि सब अन्याय है।

* कलिजुग केवल हरि गुन गाहा। गावत नर पावहिं भव थाहा।

* कलियुग में केवल भगवान के नाम गुणगान से ही भाव का थाह मिल जाता है ,नैय्या किनारे लग जाती है ।