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Pujya Sant Shri Asharamji Bapu’s Mangalmay Darshan and Diwali Message- 26 Oct 2016

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पूज्य बापूजी के मंगलमय दर्शन एवं दीपावली सन्देश – २६ अक्टूबर २०१६

पूज्य बापूजी : दिया जलाएं प्रकाश लायें सूझ बूझ । सब स्वप्न है चैतन्य अपना है । सफाई करें अर्थात किसीके लिए बुरा न सोचें, बुरा न चाहें, बुरा न करें । मिठाई खायें, खिलायें, खुश रहें और खुशियाँ बाँटें । और दिये जलायें अर्थात ज्ञान का दिया जलायें । यह भी बीत जायेगा, वह भी बीत जायेगा |

“गम की अँधेरी रात में दिल को न बेकरार कर, सुबह जल्दी आयेगी सुबह का इंतजार कर ।”

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मीडिया : बापू सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर एम्स में इलाज कराने को कहा है, यहाँ इलाज करायेंगे बापू ?

पूज्य बापूजी : हाँ, लेकिन वो बोलते हैं कि साधन ही नहीं हैं हमारे पास ।

मीडिया : फिर कैसे होगा बापू ?

पूज्य बापूजी : आयुर्वेदिक में अभी डिपार्टमेंट चालू ही नहीं हुआ है, मैं क्या करूँ ?

मीडिया : इलाज के लिए बापू आप दिल्ली आकर गये ।

जोधपुर में है ही नहीं, क्या रहेगा फिर ?

पूज्य बापूजी : जोधपुर का अब देखें क्या करते हैं ? हमारी हालत तो हम जानते हैं ! इधर तो अभी आया नहीं साधन ।

गोटाटोला ( राजनांदगाँव ) में भंडारा व सामग्री वितरण

गोटाटोला ( राजनांदगाँव ) में भंडारा व  सामग्री वितरण

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के पावन प्रेरणा से  प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी संत श्री आशारामजी आश्रम रायपुर द्वारा श्री योग वेदांत सेवा समिति राजनांदगांव के तत्वाधान में गोटाटोला ,तहसील मोहला ,जिला राजनांदगाँव (छः.ग.) आदिवासी क्षेत्र में  गरीब और जरुरतमंदों को 23 अक्टूबर को  भंडारा व जीवनुपयोगी सामग्री साध्वी कृष्णा देवीजी के सानिध्य में वितरण करके शुभ दीपावली का त्योहार मनाया गया ।
ये सारे सामान बांटे गये हैं,
1. कम्बल  2. टोपी  3. चावल  4. खजूर  5. मिठाई  6. टोस्ट   7. जीन्स  8. शर्ट  9. साडी  10. धोती  11. बाल्टी  12. साबुन कपडे धोने का  13. लेडिस फेंसी सामान 14. …लॉकेट और धागा  15. चप्पल पुरुष और महिला  16. दिया, बाती और माचिस  17. तोलिया  18. सत्साहित्य (ऋषि प्रसाद )  19 परात
4000 लोगों को भोजन भंडारा
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रायपुर आश्रम में दीपावली महोत्सव

रायपुर आश्रम में दीपावली महोत्सव

दीपावली के उपलक्ष्य में पूज्य संत श्री आशारामजी के आशीर्वाद से नर सेवा नारायण सेवा के वाक्य को चरितार्थ करते हुए श्री योग वेदांत सेवा समिति,रायपुर (छ.ग.) ,युवा सेवा संघ  बाल संस्कार विभाग, सुसंस्कार केंद्र कोटाद्वारा गरीब आदिवासियों में अन्न, वस्त्र, मिठाई, कम्बल, दिया- तेल वितरण तथा आश्रम में नूतन वर्ष पर शुभ दर्शन व गोवर्धन पूजा भी किया गया |

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रायपुर में दीपावली गरीबो के साथ भी

रायपुर में दीपावली गरीबो के साथ भी 

संत श्री आशारामजी बापू की पावन प्रेरणा से श्री योग वेदांत सेवा समिति रायपुर छत्तीसगढ़,के साधको ने  दीपावली पर्व पर गरीब जरुरत मंद लोगो  को  मिठाई , साडी ,दीप ,तेल, बाती  का वितरण कर भोजन भंडारा करा बापू जी का दीपावली संदेश साहित्य बाटी गई |

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दिवाली का यह अर्थ आपको पता नही होगा!!

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जैसी सुबह बीतती है ऐसा ही सारा दिन बीतता है। वर्ष की सुबह माने नूतन वर्ष का प्रथम दिन। यह प्रथम दिन जैसा बीतता है ऐसा ही सारा वर्ष बीतता है।

हम उन ऋषियों को धन्यवाद देते हैं कि जिन्होंने दिवाली जैसे पर्वों का आयोजन करके मनुष्य से मनुष्य को नजदीक लाने का प्रयास किया है, मनुष्य की सुषुप्त शक्तियों को जगाने का सन्देश दिया है। जीवात्मा का परमात्मा से एक होने के लिए भिन्न-भिन्न उपाय खोजकर उनको समाज में, गाँव-गाँव और घर-घर में पहुँचाने के लिए उन आत्मज्ञानी महापुरुषों ने पुरुषार्थ किया है। उन महापुरुषों को आज हम हजार-हजार प्रणाम करते हैं।

यो यादृशेन भावेन तिष्ठत्यस्यां युधिष्ठिर।

हर्षदैन्यादिरूपेण तस्य वर्षं प्रयाति वै।।

वेदव्यासजी महाराज युधिष्ठिर से कहते हैं-

“आज वर्ष के प्रथम दिन जो व्यक्ति हर्ष में रहता है उसका सारा वर्ष हर्ष में बीतता है। जो व्यक्ति चिन्ता और शोक में रहता है उसका सारा वर्ष ऐसा ही जाता है।”

जैसी सुबह बीतती है ऐसा ही सारा दिन बीतता है। वर्ष की सुबह माने नूतन वर्ष का प्रथम दिन। यह प्रथम दिन जैसा बीतता है ऐसा ही सारा वर्ष बीतता है।

व्यापारी सोचता है कि वर्ष भर में कौन सी चीजें दुकान में बेकार पड़ी रह गईं, कौन सी चीजों में घाटा आया और कौन सी चीजों में मुनाफा हुआ। जिन चीजों में घाटा आता है उन चीजों का व्यापार वह बन्द कर देता है। जिन चीजों में मुनाफा होता है उन चीजों का व्यापार वह बढ़ाता है।

इसी प्रकार भक्तों एवं साधकों को सोचना चाहिए कि वर्ष भर में कौन-से कार्य करने से हृदय उद्विग्न बना, अशान्त हुआ, भगवान, शास्त्र एवं गुरुदेव के आगे लज्जित होना पड़ा अथवा अपनी अन्तरात्मा नाराज हुई। ऐसे कार्य, ऐसे धन्धे, ऐसे कर्म, ऐसी दोस्ती बन्द कर देनी चाहिए। जिन कर्मों के लिए सदगुरु सहमत हों और जिन कर्मों से अपनी अन्तरात्मा प्रसन्न हो, भगवान प्रसन्न हों, ऐसे कर्म बढ़ाने का संकल्प कर लो।

आज का दिन वर्षरूपी डायरी का प्रथम पन्ना है। गत वर्ष की डायरी का सिंहावलोकन करके जान लो कि कितना लाभ हुआ और कितनी हानि हुई। आगामी वर्ष के लिए थोड़े निर्णय कर लो कि अब ऐसे-ऐसे जीऊँगा। आप जैसे बनना चाहते हैं ऐसे भविष्य में बनेंगे, ऐसा नहीं। आज से ही ऐसा बनने की शुरुआत कर दो। ‘मैं अभी से ही ऐसा हूँ।’ यह चिन्तन करो। ऐसे न होने में जो बाधाएँ हों उन्हें हटाते जाओ तो आप परमात्मा का साक्षात्कार भी कर सकते हो। कुछ भी असंभव नहीं है।

आप धर्मानुष्ठान और निष्काम कर्म से विश्व में उथल पुथल कर सकते हैं। उपासना से मनभावन इष्टदेव को प्रकट कर सकते हैं। आत्मज्ञान से अज्ञान मिटाकर राजा खटवांग, शुकदेव जी और राजर्षि जनक की तरह जीवन्मुक्त भी बन सकते हैं।

आज नूतन वर्ष के मंगल प्रभात में पक्का संकल्प कर लो कि सुख-दुःख में, लाभ-हानि में और मान-अपमान में सम रहेंगे। संसार की उपलब्धियों एवं अनुपलब्धियों में खिलौनाबुद्धि करके अपनी आत्मा आयेंगे। जो भी व्यवहार करेंगे वह तत्परता से करेंगे। ज्ञान से युक्त होकर सेवा करेंगे, मूर्खता से नहीं। ज्ञान-विज्ञान से तृप्त बनेंगे। जो भी कार्य करेंगे वह तत्परता से एवं सतर्कता से करेंगे।

रोटी बनाते हो तो बिलकुल तत्परता से बनाओ। खाने वालों की तन्दरुस्ती और रूचि बनी रहे ऐसा भोजन बनाओ। कपड़े ऐसे धोओ कि साबुन अधिक खर्च न हो, कपड़े जल्दी फटे नहीं और कपड़ों में चमक भी आ जाये। झाड़ू ऐसा लगाओ कि मानो पूजा कर रहे हो। कहीं कचरा न रह जाये। बोलो ऐसा कि जैसा श्रीरामजी बोलते थे। वाणी सारगर्भित, मधुर, विनययुक्त, दूसरों को मान देनेवाली और अपने को अमानी रखने वाली हो। ऐसे लोगों का सब आदर करते हैं।

अपने से छोटे लोगों के साथ उदारतापूर्ण व्यवहार करो। दीन-हीन, गरीब और भूखे को अन्न देने का अवसर मिल जाय तो चूको मत। स्वयं भूखे रहकर भी कोई सचमुच भूखा हो तो उसे खिला दो तो आपको भूखा रहने में भी अनूठा मजा आयेगा। उस भोजन खाने वाले की तो चार-छः घण्टों की भूख मिटेगी लेकिन आपकी अन्तरात्मा की तृप्ति से आपकी युगों-युगों की और अनेक जन्मों की भूख मिट जायेगी।

अपने दुःख में रोने वाले ! मुस्कुराना सीख ले।

दूसरों के दर्द में आँसू बहाना सीख ले।

जो खिलाने में मजा है आप खाने में नहीं।

जिन्दगी में तू किसी के काम आना सीख ले।।

सेवा से आप संसार के काम आते हैं। प्रेम से आप भगवान के काम आते हैं। दान से आप पुण्य और औदार्य का सुख पाते हैं और एकान्त व आत्मविचार से दिलबर का साक्षात्कार करके आप विश्व के काम आते हैं।

लापरवाही एवं बेवकूफी से किसी कार्य को बिगड़ने मत दो। सब कार्य तत्परता, सेवाभाव और उत्साह से करो। भय को अपने पास भी मत फटकने दो। कुलीन राजकुमार के गौरव से कार्य करो।

बढ़िया कार्य, बढ़िया समय और बढ़िया व्यक्ति का इन्तजार मत करो। अभी जो समय आपके हाथ में है वही बढ़िया समय है। वर्त्तमान में आप जो कार्य करते हैं उसे तत्परता से बढ़िया ढंग से करें। जिस व्यक्ति से मिलते हैं उसकी गहराई में परमेश्वर को देखकर व्यवहार करें। बढ़िया व्यक्ति वही है जो आपके सामने है। बढ़िया काम वही है जो शास्त्र-सम्मत है और अभी आपके हाथ में है।

गंडाई जिला राजनांदगाव में सत्संग व भंडारा

गंडाई जिला राजनांदगाव में सत्संग व भंडारा

परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की शिष्या साध्वी कृष्णा देवीजी द्वारा चोड़राधाम जंगलपुर घाट ,नर्मदा से 7 की.मी.पैलीमेटा वाला मार्ग ,गंडाई जिला राजनांदगाव (छत्तीसगढ़) में भव्य सत्संग व विशाल भंडारा का आयोजन दिनांक 29 अक्टूबर 2015 को किया गया ,जिसमे जरुरतमंद लोगो को पूज्य बापूजी की पवन प्रेरणा से नर सेवा नारायण सेवा को चरितार्थ करता निम्न सामग्री वितरण किया गया – स्टील बर्तन ,कम्बल ,कपडे ,मिठाई ,चप्पल ,तेल ,साबुन ,के अलावा विश्व शांति हेतु हवन फिर भोजन प्रसाद की भी सुंदर व्यवथा संत श्री आशारामजी आश्रम रायपुर व श्री योग वेदांत सेवा समिति राजनंदगांव एवं गंडाई के तत्वधान में संपन्न हुई |

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