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पुण्यशीला माँ गंगा (श्री गंगा जयंती विशेष )

Ganga-modi-planनारद पुराण के अनुसार कलियुग में गंगाजी की विशेष महिमा है | कलियुग में तीर्थ स्वभावतः अपनी अपनी शक्तियों को गंगाजी में छोड़ते है परन्तु गंगा जी अपनी शक्तियों को कही नहीं छोड़ती | गंगाजी पातको के कारण नर्क में गिरनेवाले नराधम पापियों को भी तार देती है | कई अज्ञात स्थान में मर गये हो और उनके लिए शास्त्रीय विधि से तर्पण नहीं किया गया हो तो ऐसे लोगो की हिड॒डयॉ यदि गंगाजी में प्रवाहित करते है तो उनको परलोक में उत्तम फल की प्राप्ति होती है | बासी जल और बासी दल त्याग देने योग्य माना गया है परन्तु गंगाजल और तुलसीदल बासी होने पर भी त्याज्य नहीं है | इस लोक में गंगा जी की सेवा में तत्पर रहनेवाले मनुष्य को आधे दिन की सेवा से जो फल प्राप्त होता है वह सेकड़ो यज्ञो द्वारा भी नहीं मिलता है । (नारद पुराण )

गंगाजी की महिमा बताते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : जैसे मंत्रो में ॐकार, स्त्रीयों में गौरीदेवी, तत्वों में गुरु-तत्व और विघाओं में आत्मविधा उत्तम है उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थो में गंगातीथे विशेष माना गया है |’” गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया है :

संसारविषनाशिन्ये जीवनायै नमोऽस्तु ते |
तापत्रितयसंहन्त्रयै प्राणेश्यै ते नमो नम : ||

“देवी गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करनेवाली है | आप जीवनरुपा है | आप आधिभौतिक,आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करनेवाली तथा प्राणों की स्वामिनी हैं | आपको बार बार नमस्कार है |”

पुज्य बापूजी पिछले अनेक वर्षो से गंगाजी की महिमा बताकर लोगों को गंगाजी में गंदगी न डालने का आह्वान करते आये हैं | आप स्वयं माँ गंगा के अमृतमय जल का उपयोग करते हैं | बापूजी के करोड़ों शिष्य भी माँ गंगा का आदर –पूजन –रक्षण करने –कराने में भागीदार होते हैं ।