Category Archives: Kartik Poonam

रायपुर आश्रम में त्रिपुरारी पूर्णिमा

 चातुर्मास के पावन दिनों में साधको के निवास स्थान पर पूज्यश्री की जीवन लीला पर आधारित श्री आशारामायण पाठ का आयोजन किया गया जिनका  समापन (पूर्णाहुति) पर रायपुर आश्रम में त्रिपुरारी पूर्णिमा पर 14 नवम्बर 2016  को पादुका पूजन , माला पूजन ,सामूहिक यज्ञ – हवन व भंडारा का कार्यक्रम किया गया  |

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कार्तिक मास – अमिट पुण्य अर्जित करने का काल

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(कार्तिक मास व्रत : २७ अक्टूबर से २५ नवम्बर )

स्कन्द पुराण में लिखा है : ‘ कार्तिक मास के समान और कोई मास नहीं है , सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है , वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान दूसरा कोई तीर्थ नहीं है |’            (वैष्णव खंड, का. मा. : १.३६-३७)

कार्तिक मास में सुबह नींद से उठते ही अपने शुभ (आत्मा-परमात्मा ) का चिंतन करें | आज क्या देय ( देने योग्य ) है ? क्या अनुकरणीय है और क्या त्याज्य है ? – यह विचार कर लें | फिर शांतचित्त होकर अपने परमात्मदेव का सुमिरन करने एवं मंत्र जप के बाद जिस तरफ के नथुने से श्वास चलता हो वही हाथ मुंह की उसी तरफ घुमाएं और वही पैर धरती पर रखें तो मनोरथ सफल होता है |

कार्तिक मास में वर्जित

ब्रह्मा जी ने नारदजी को कहा : ‘ कार्तिक मास में चावल, दालें , गाजर, बैंगन , लौकी और बासी अन्न नहीं खाना चाहिए | जिन फलों में बहुत सारे बीज हों उनका भी त्याग करना चाहिए और संसार-व्यवहार न करें |’

कार्तिक मास में विशेष पुण्यदायी

प्रातः स्नान, दान, जप , व्रत, मौन, देव-दर्शन , गुरु-दर्शन, पूजन का अमिट पुण्य होता है | सवेरे तुलसी का दर्शन भी समस्त पापनाशक है | भूमि पर शयन, ब्रह्मचर्य का पालन , दीपदान अथवा तुलसी के पौधे लगाना हितकारी है |

भगवद्गीता का पाठ करना एवं उसके अर्थ में अपने मन को लगाना चाहिए | ब्रह्मा जी नारद जी को कहते हैं कि ‘ ऐसे व्यक्ति के पुण्यों का वर्णन महीने तक भी नहीं किया जा सकता |’ श्रीविष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करना भी विशेष लाभदायी है | ॐ नमो नारायणाय | इस महामंत्र का जो जितना अधिक जप करे उसका उतना अधिक मंगल होता है | कम से कम 108 बार तो जप करना ही चाहिए |

प्रातः उठकर करदर्शन करें | ‘ पुरुषार्थ से लक्ष्मी, यश , सफलता तो मिलती है पर परम पुरुषार्थ मेरे नारायण की प्राप्ति में सहायक हो ‘ – इस भावना से हाथ देखें तो कार्तिक मास में विशेष पुण्यदायी होता है |