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लाभ पंचमी को कैसे पायें पाँच प्रकार के लाभ – (लाभ पंचमी) ५ नवम्बर

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सत्संग के मुख्य अंश :

*लाभ पंचमी को ज्ञान पंचमी भी कहते हैं।

*पाँचो इन्द्रियों (शब्द,स्पर्श,रूप,रस,गंध) को ज्ञान के नियंत्रण में चलाना ।

*पाँचो विकारों से जो बचता है वो पाँचों भूतों को नियंत्रित करने वाली सत्ता से एकाकार हो जाता है।

*गुरु कृपा ही केवलं शिष्यस्य परं मंगलम् |परम् मङ्गल तो परमात्म प्राप्ति से ही होता है|

*जो काल की धारा में बह जाये उसे बोलते हैं प्रकृति और जो काल की धर क दृष्ट साक्षी है उसे बोलते हैं परमात्मा|

* लाभ पञ्चमी को आत्म-लाभ करे|

*आत्मलाभात्‌ परम्‌ लाभं न विद्यते । आत्म लाभ से बढ़ कर कोई लाभ नहीं है ।

*आत्मज्ञानात्‌ परम्‌ ज्ञानं न विद्यते । आत्म ज्ञान से बढ़ कर कोई ज्ञान नहीं है ।

*आत्मसुखात्‌ परम्‌ सुखं न विद्यते । आत्म सुख से बढ़ कर कोई सुख नहीं है।