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रायपुर में चातुर्मास श्री आशारामायण पाठ प्रारंभ

रायपुर में चातुर्मास श्री आशारामायण पाठ प्रारंभ

     पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से रायपुर आश्रम के तत्वधान में प्रत्येक वर्ष चातुर्मास में पूज्यश्री के जीवन लीला पर आधारित श्री आशारामायण पाठ व भजन कीर्तन कार्यक्रम  का आयोजन साधको के निवास स्थान पर किया जाता है जिसका प्रारंभ आज देवशयनी एकादशी को फाफाडीह, रायपुर से किया गया |

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महाशिवरात्रि पर्व रायपुर

महाशिवरात्रि पर्व रायपुर

पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने अपने सत्संग में कई बार यह शास्त्रीय बात बताई है की – शिवरात्रि की रात चार अहोरात्रियों में से एक है | इस रात्रि में संकीर्तन, जप, ध्यान का विशेष प्रभाव रहता है | व उसका फल भी कई गुना होता है | ऐसी महाहिव्रात्रि की रात में जो सवा लाख बार ‘बम’ बीज मंत्र का जप करता है, उसका गठिया ठीक हो जाता है | अन्य कितने ही वातजन्य बीमारियाँ मिट जाती हैं | ऐसे महान पर्व शिवरात्रि का जप ध्यान करके सबको अवश्य ही लाभ लेना चाहिए |”

महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य पर  पूज्य संत श्री आशारामजी बापू आश्रम रायपुर के तत्वाधान में दिनांक 19 फरवरी  को ग्राम-फुंडहर में महाशिवरात्रि पर्व निमित्त संकीर्तन यात्रा का आयोजन हुआ | सैकड़ों की संख्या में लोगों ने यात्रा में हिस्सा लिया | सभी ग्रामवासियों ने यात्रा में हो रहे – ‘ॐ नमः शिवाय, हरी ॐ संकीर्तन’ का आनंद लिया | राहगीरों में पलाश शरबत का वितरण भी किया गया | इसके साथ ही शिवरात्रि पर बनी झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं |

24 फरवरी 2017 को पूज्य संत श्री आशारामजी बापू आश्रम रायपुर में शिव पुजन ,जागरण के साथ प्रत्येक पहर पर रुद्राभिषेक भी किया गया |

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महाशिवरात्रि पर्व रायपुर

महाशिवरात्रि पर्व रायपुर 

7 मार्च को रायपुर आश्रम में महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान सदा शिव का विशेष पूजन ,श्रृंगार , रूद्रअभिषेक ,जप – यज्ञ व जागरण किया गया |महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य पर एक दिन पूर्व  6 मार्च को फुण्डहर ,रायपुर से साधको द्वारा भगवान शिव की झांकी के साथ संकीर्तन यात्रा निकाला गया |

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Shivratri Related Tips

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1] शिवरात्रि की रात ‘ॐ नमः शिवाय’ जप –
शिवजी का पत्रम-पुष्पम् से पूजन करके मन से मन का संतोष करें, फिर ॐ नमः शिवाय…. ॐ नमः शिवाय…. शांति से जप करते गये। इस जप का बड़ा भारी महत्त्व है। अमुक मंत्र की अमुक प्रकार की रात्रि को शांत अवस्था में, जब वायुवेग न हो आप सौ माला जप करते हैं तो आपको कुछ-न-कुछ दिव्य अनुभव होंगे। अगर वायु-संबंधी बीमारी हैं तो ‘बं बं बं बं बं’ सवा लाख जप करते हो तो अस्सी प्रकार की वायु-संबंधी बीमारियाँ गायब !
ॐ नमः शिवाय मंत्र तो सब बोलते हैं लेकिन इसका छंद कौन सा है, इसके ऋषि कौन हैं, इसके देवता कौन हैं, इसका बीज क्या है, इसकी शक्ति क्या है, इसका कीलक क्या है – यह मैं बता देता हूँ।
अथ ॐ नमः शिवाय मंत्र। वामदेव ऋषिः। पंक्तिः छंदः। शिवो देवता। ॐ बीजम्। नमः शक्तिः। शिवाय कीलकम्।
अर्थात् ॐ नमः शिवाय का कीलक है ‘शिवाय’, ‘नमः’ है शक्ति, ॐ है बीज… हम इस उद्देश्य से (मन ही मन अपना उद्देश्य बोलें) शिवजी का मंत्र जप रहे हैं – ऐसा संकल्प करके जप किया जाय तो उसी संकल्प की पूर्ति में मंत्र की शक्ति काम देगी।

2] शिवरात्रि के दिन करने योग्य विशेष बातें-

१. शिवरात्रि के दिन की शुरुआत ये श्लोक बोल के शुरू करें :-

देव देव महादेव नीलकंठ नमोस्तुते l

कर्तुम इच्छा म्याहम प्रोक्तं, शिवरात्रि व्रतं तव ll

२. किसी के घर में कम उम्र में लोग मर जाते हों तो वो बड़ा कटोरा लेकर उस में पानी भर के उस कटोरे में धातु का (मेटल का) कछुआ रखे l महामृत्युंजय मंत्र का जप करें और कछुए को तिलक कर के कटोरा ईशान कोण में रख दे ……..ऐसा ७ या ११ अमावस्या तक करें ……लोटा पानी से भर के रखें ….७ वें या ११ वीं अमावस्या को गीता के ७ वें अध्याय का पाठ करें …..छत पे जाकर सूर्य भगवान को प्रार्थना करें कि…….यमराज आप का बेटा है, आप हमारी प्रार्थना उन तक पहुंचा दीजिये ….हमारे घर में ऐसी मृत्यु होती है…….दोबारा ऐसा ना हो इसलिए जो गुजर गए, उन को गीता पाठ का पुण्य अर्पण करते हैं…….ऐसा ७ या ११ अमावस्या तक करें l

३. काल सर्प के लिए महाशिवरात्रि के दिन घर के मुख्य दरवाजे पर पिसी हल्दी से स्वस्तिक बना देना….शिवलिंग पर दूध और बिल्व पत्र चढ़ाकर जप कराना और रात को ईशान कोण में मुख कर के जप करना l

४. शिवरात्रि के दिन ईशान कोण में मुख करके जप करने की महिमा विशेष है, क्यूंकि ईशान के स्वामी शिव जी हैं l रात को जप करें, ईशान को दिया जलाकर पूर्व के तरफ रखे, लेकिन हमारा मुख ईशान में हो तो विशेष लाभ होगा l जप करते समय झोखा आये तो खड़े होकर जप करना l

५. महाशिवरात्रि को कोई मंदिर जाकर शिव जी पे दूध चढाते हैं तो ये ५ मंत्र बोलें :- ॐ हरये नमः ॐ महेश्वराए नमः ॐ शूलपानायाय नमः ॐ पिनाकपनाये नमः ॐ पशुपतये नमः

६. महाशिवरात्रि की रात को ११.४५ से १.३० बजे तक पूज्य सदगुरुदेवजी भगवान् के स्वास्थ्य और दीर्घायु के संकल्प से महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, पहले ११ बार खुद बोले (११ माला नहीं, सिर्फ ११ बार बोले) फिर बापूजी को १ माला समर्पित करें l

 

महाशिवरात्रि के दिन मंत्र और पाठ

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महाशिवरात्रि के दिन मंत्र और पाठ 

1] Mahamritunjaya Mantra (महामृत्युंजय मंत्र )
                               ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम |
                               उर्वारुकमिव बन्धनामृत्योर्मूक्षीय मामुतात ||

महा मृत्युंजय मंत्र विनियोग सहित विनियोग :-
ॐ अस्य श्री महा मृत्युंजय मन्त्रस्य वशिष्ठ ऋषिः अनुष्टुप छन्दः श्री महा मृत्युंजय रूद्र देवता, हौं बिजम् जूँ शक्तिः सः कीलकं …( संकल्प जिस लिए करते हो..जैसे ” श्री आशारामजी सद्गुरु देवस्य आयुः, आरोग्य , यशः , किर्ती, पुष्टिः,वृद्धि अर्थे )…..जपे विनियोगः |
मंत्र :-
ॐ हौं जूँ सः । ॐ भूर्भुवः स्वः । ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् । ॐ स्वः भुवः भूः ॐ । सः जूँ हौं ॐ ।

यह मंत्र रोग-निवारण , दीर्घायु, धन-संपत्ति, एवं शांति के लिए लाभदायी है | अकालमृत्यु, आकस्मिक दुर्घटनाओं , भयंकर व्याधियों से रक्षा तथा मोक्ष का साधन है |
महा शिवरात्रि को विशेष लाभ लें |

2] बीज मंत्र का जप : शिवरात्रि के दिन देशी घी का दिया जला कर
‘ बं ‘ 
बीजमंत्र का सवा लाख जप करना बहुत हितकारी है | यह मंत्र शुद्ध, सात्विक भावनाओं को सफल करने में बड़ा सहयोग देगा | हो सके तो एकांत में शिवजी का विधिवत पूजन करें या मानसिक पूजन करें | सवा लाख बार  
‘ बं ‘
 का उच्चारण भिन्न-भिन्न सफलताएँ प्राप्त करने में मदद करेगा | जोड़ों का दर्द, वमन, कफ एवं वायुजन्य बीमारियों, डायबिटीज आदि में यह लाभ पहुँचाता है | बीजमंत्र स्थूल शरीर को फायदा पहुँचाते ही हैं, साथ ही सूक्ष्म और कारण शरीर पर भी अपना दिव्य प्रभाव डालते हैं |

3] शिवमहिमा स्तोत्र  :  download-now

4] शिवरात्रि के दिन की शुरुआत यह श्लोक बोलकर करें 

देव देव महादेव नीलकंठ नमोस्तुते |
कर्तुम इच्छा म्याहम प्रोक्तं, शिवरात्रि व्रतं तव ||
– सुरेशानंदजी  हरिद्वार (11-02-2010)

5] शिवजी पर दूध चढाते समय जपने योग्य मंत्र

महाशिवरात्रि को कोई मंदिर जाकर शिवजी पर दूध चढाते हैं तो ये ५ मंत्र बोलें :-

ॐ हरये नमः
ॐ महेश्वराय नमः
ॐ शूलपानायाय नमः
ॐ पिनाकपनाये नमः
ॐ पशुपतये नमः

विष्णुपदी संक्रांति – १५ मई २०१५

vishnu_24विष्णुपदी संक्रांति
पुण्यकाल:  सूर्योदय से सुबह  10:38  तक
विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है | (पद्म पुराण)