Category Archives: Mantra & Path

Shivratri Related Tips

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Shivratri Related Tips
1] शिवरात्रि की रात ‘ॐ नमः शिवाय’ जप –
शिवजी का पत्रम-पुष्पम् से पूजन करके मन से मन का संतोष करें, फिर ॐ नमः शिवाय…. ॐ नमः शिवाय…. शांति से जप करते गये। इस जप का बड़ा भारी महत्त्व है। अमुक मंत्र की अमुक प्रकार की रात्रि को शांत अवस्था में, जब वायुवेग न हो आप सौ माला जप करते हैं तो आपको कुछ-न-कुछ दिव्य अनुभव होंगे। अगर वायु-संबंधी बीमारी हैं तो ‘बं बं बं बं बं’ सवा लाख जप करते हो तो अस्सी प्रकार की वायु-संबंधी बीमारियाँ गायब !
ॐ नमः शिवाय मंत्र तो सब बोलते हैं लेकिन इसका छंद कौन सा है, इसके ऋषि कौन हैं, इसके देवता कौन हैं, इसका बीज क्या है, इसकी शक्ति क्या है, इसका कीलक क्या है – यह मैं बता देता हूँ।
अथ ॐ नमः शिवाय मंत्र। वामदेव ऋषिः। पंक्तिः छंदः। शिवो देवता। ॐ बीजम्। नमः शक्तिः। शिवाय कीलकम्।
अर्थात् ॐ नमः शिवाय का कीलक है ‘शिवाय’, ‘नमः’ है शक्ति, ॐ है बीज… हम इस उद्देश्य से (मन ही मन अपना उद्देश्य बोलें) शिवजी का मंत्र जप रहे हैं – ऐसा संकल्प करके जप किया जाय तो उसी संकल्प की पूर्ति में मंत्र की शक्ति काम देगी।

2] शिवरात्रि के दिन करने योग्य विशेष बातें-

१. शिवरात्रि के दिन की शुरुआत ये श्लोक बोल के शुरू करें :-

देव देव महादेव नीलकंठ नमोस्तुते l

कर्तुम इच्छा म्याहम प्रोक्तं, शिवरात्रि व्रतं तव ll

२. किसी के घर में कम उम्र में लोग मर जाते हों तो वो बड़ा कटोरा लेकर उस में पानी भर के उस कटोरे में धातु का (मेटल का) कछुआ रखे l महामृत्युंजय मंत्र का जप करें और कछुए को तिलक कर के कटोरा ईशान कोण में रख दे ……..ऐसा ७ या ११ अमावस्या तक करें ……लोटा पानी से भर के रखें ….७ वें या ११ वीं अमावस्या को गीता के ७ वें अध्याय का पाठ करें …..छत पे जाकर सूर्य भगवान को प्रार्थना करें कि…….यमराज आप का बेटा है, आप हमारी प्रार्थना उन तक पहुंचा दीजिये ….हमारे घर में ऐसी मृत्यु होती है…….दोबारा ऐसा ना हो इसलिए जो गुजर गए, उन को गीता पाठ का पुण्य अर्पण करते हैं…….ऐसा ७ या ११ अमावस्या तक करें l

३. काल सर्प के लिए महाशिवरात्रि के दिन घर के मुख्य दरवाजे पर पिसी हल्दी से स्वस्तिक बना देना….शिवलिंग पर दूध और बिल्व पत्र चढ़ाकर जप कराना और रात को ईशान कोण में मुख कर के जप करना l

४. शिवरात्रि के दिन ईशान कोण में मुख करके जप करने की महिमा विशेष है, क्यूंकि ईशान के स्वामी शिव जी हैं l रात को जप करें, ईशान को दिया जलाकर पूर्व के तरफ रखे, लेकिन हमारा मुख ईशान में हो तो विशेष लाभ होगा l जप करते समय झोखा आये तो खड़े होकर जप करना l

५. महाशिवरात्रि को कोई मंदिर जाकर शिव जी पे दूध चढाते हैं तो ये ५ मंत्र बोलें :- ॐ हरये नमः ॐ महेश्वराए नमः ॐ शूलपानायाय नमः ॐ पिनाकपनाये नमः ॐ पशुपतये नमः

६. महाशिवरात्रि की रात को ११.४५ से १.३० बजे तक पूज्य सदगुरुदेवजी भगवान् के स्वास्थ्य और दीर्घायु के संकल्प से महामृत्युंजय मंत्र का जप करें, पहले ११ बार खुद बोले (११ माला नहीं, सिर्फ ११ बार बोले) फिर बापूजी को १ माला समर्पित करें l

 

महाशिवरात्रि के दिन मंत्र और पाठ

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महाशिवरात्रि के दिन मंत्र और पाठ 

1] Mahamritunjaya Mantra (महामृत्युंजय मंत्र )
                               ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम |
                               उर्वारुकमिव बन्धनामृत्योर्मूक्षीय मामुतात ||

महा मृत्युंजय मंत्र विनियोग सहित विनियोग :-
ॐ अस्य श्री महा मृत्युंजय मन्त्रस्य वशिष्ठ ऋषिः अनुष्टुप छन्दः श्री महा मृत्युंजय रूद्र देवता, हौं बिजम् जूँ शक्तिः सः कीलकं …( संकल्प जिस लिए करते हो..जैसे ” श्री आशारामजी सद्गुरु देवस्य आयुः, आरोग्य , यशः , किर्ती, पुष्टिः,वृद्धि अर्थे )…..जपे विनियोगः |
मंत्र :-
ॐ हौं जूँ सः । ॐ भूर्भुवः स्वः । ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् । ॐ स्वः भुवः भूः ॐ । सः जूँ हौं ॐ ।

यह मंत्र रोग-निवारण , दीर्घायु, धन-संपत्ति, एवं शांति के लिए लाभदायी है | अकालमृत्यु, आकस्मिक दुर्घटनाओं , भयंकर व्याधियों से रक्षा तथा मोक्ष का साधन है |
महा शिवरात्रि को विशेष लाभ लें |

2] बीज मंत्र का जप : शिवरात्रि के दिन देशी घी का दिया जला कर
‘ बं ‘ 
बीजमंत्र का सवा लाख जप करना बहुत हितकारी है | यह मंत्र शुद्ध, सात्विक भावनाओं को सफल करने में बड़ा सहयोग देगा | हो सके तो एकांत में शिवजी का विधिवत पूजन करें या मानसिक पूजन करें | सवा लाख बार  
‘ बं ‘
 का उच्चारण भिन्न-भिन्न सफलताएँ प्राप्त करने में मदद करेगा | जोड़ों का दर्द, वमन, कफ एवं वायुजन्य बीमारियों, डायबिटीज आदि में यह लाभ पहुँचाता है | बीजमंत्र स्थूल शरीर को फायदा पहुँचाते ही हैं, साथ ही सूक्ष्म और कारण शरीर पर भी अपना दिव्य प्रभाव डालते हैं |

3] शिवमहिमा स्तोत्र  :  download-now

4] शिवरात्रि के दिन की शुरुआत यह श्लोक बोलकर करें 

देव देव महादेव नीलकंठ नमोस्तुते |
कर्तुम इच्छा म्याहम प्रोक्तं, शिवरात्रि व्रतं तव ||
– सुरेशानंदजी  हरिद्वार (11-02-2010)

5] शिवजी पर दूध चढाते समय जपने योग्य मंत्र

महाशिवरात्रि को कोई मंदिर जाकर शिवजी पर दूध चढाते हैं तो ये ५ मंत्र बोलें :-

ॐ हरये नमः
ॐ महेश्वराय नमः
ॐ शूलपानायाय नमः
ॐ पिनाकपनाये नमः
ॐ पशुपतये नमः

विष्णुपदी संक्रांति – १५ मई २०१५

vishnu_24विष्णुपदी संक्रांति
पुण्यकाल:  सूर्योदय से सुबह  10:38  तक
विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है | (पद्म पुराण)

 

Sadguru Removes Ignorance And Sorrow

Paraspar Bhavyantu

Shri Ramakrishna Paramahamsa (Thakur) had an old-aged disciple, Manimohan. One day, he lost his promising young son. After performing the last rites of his son, he came straight to Thakur’s satsang and started listening to it sitting in a corner. He had heard in an earlier satsang that in case of death of a near and dear, one should not abandon satsang; rather one should listen to satsang purposely. Satsang is the ultimate medicine that cures all sorrows. Sadguru’s satsang solves many a complex problems of life and Sadguru’s darshan gives solace to a despondent heart.

After some time, Thakur happened to look at him and asked him, “Why is it that you are looking sad and despondent today?”

Manimohan was overwhelmed with sorrow and he said in a crying broken voice, “Today, my young son has died.”

As the old man cried, all present began to console him. But Shri Ramakrishna Paramahamsa kept on looking and hearing calmly. Suddenly, he stood up like a warrior ready to fight and addressing Manimohan, he sang a song in Bengali language, the meaning of which was, ‘O man! Be ready for the battle. See, Death clad in a warrior’s dress is entering your house. Ride the chariot of virtue; let it be driven by the two horses of spiritual discipline and devotional practices; and fix the infallible divine arrow of Bhakti on the bow of Knowledge to shoot at him.’

As they heard the song, Manimohan and the others were relieved of sorrow and delusion. Manimohan became calm and composed. After singing the song, the great soul was absorbed in the state of Samadhi. All present sat engrossed in love and devotion. After some time, Shri Ramakrishna came out of the Samadhi and striking at Manimohan’s delusion with the axe of discrimination, he said, “Oh! Is there any tragedy in the world more painful than the death of one’s son? How long does the relationship with son etc. last! In the hope of getting happiness, one marries; then he begets children. They are grown up and married off. Some happy days pass. Then one of them may fall ill; another may die or take to a wrong path. Then he (the father) is afflicted by all kinds of worries. But those who hold on to Sadguru’s words are saved from being drowned in the ocean of samsara.”

Thus Shri Ramakrishna enlightened him that the world is transient and without substance and that taking refuge with Sadguru is the only way to happiness. And he tactfully applied the ointment of Love Divine to the heart wounded by the loss of his son. Manimohan attained equanimity and expressing his adoration and gratitude to the Guru, he said, “I knew that none but the Sadguru would be able to douse the fire of worldly delusion that scorched my heart. Therefore, I ran towards you. Who else can give the medicine of Knowledge to worldly men suffering from the deadly disease of delusion?”

‘Even if millions of Moons or thousands of Suns shine in the sky,

In spite of all their light there is pitch darkness without the Guru who gives the Light of Truth.’

दुःख-अज्ञानहर्ता सद्गुरुदेव

श्री रामकृष्ण परमहंस (ठाकुर) का एक गृहस्थ वृद्ध शिष्य था मणिमोहन । एक दिन उसके होनहार जवान पुत्र की मृत्यु हो गयी । पुत्र की अंतिम क्रिया करके वह सीधे ठाकुर के सत्संग में आ गया और प्रणाम करके एक कोने में बैठकर सत्संग सुनने लगा । उसने सत्संग में सुना था कि किसीकी मृत्यु होने पर सत्संग का त्याग नहीं करना चाहिए बल्कि यत्नपूर्वक उसे करना चाहिए । सत्संग दुःखों को दूर करनेवाली परम औषधि है । सद्गुरु के सत्संग से जीवन की जटिल गुत्थियाँ खुल जाती हैं तथा उनके दर्शन से गिरता हुआ दिल भी सँभल जाता है ।

कुछ क्षणों बाद ठाकुर की दृष्टि उस पर पड़ी तो उन्होंने सहजता से पूछा : ‘‘आज तुम दुःखी व उदास क्यों दिखायी दे रहे हो ?’’

मणिमोहन का दिल भर आया और उसने कम्पित स्वर से रोते हुए कहा : ‘‘आज मेरे जवान बेटे की मृत्यु हो गयी है ।’’

उस वृद्ध का करुण रुदन सुनकर सारे लोग उसे सांत्वना देने लगे किन्तु रामकृष्ण परमहंस शांत भाव से सब देखते-सुनते रहे । कुछ समय बाद ठाकुर सहसा ताल ठोककर खड़े हुए और मणिमोहन को लक्षित करके बंगाली में गीत गाने लगे, जिसका भावार्थ था कि ‘हे जीव ! युद्ध के लिए तैयार हो जाओ । यह देखो रणवेश को धारण कर काल तुम्हारे घर के अंदर प्रविष्ट हो रहा है । महापुण्यरूप रथ में चढ़कर, साधन-भजन के दो घोड़ो को उसमें जोत के, ज्ञानधनुष में टंकार देकर भक्तिरूप ब्रह्मबाण का संयोग करो ।’

भजन सुन के सभी लोगों के साथ मणिमोहन का भी शोक-मोह दूर हो गया । वह शांत, निश्चल व गम्भीर हो गया । गीत समाप्त हुआ और वे महापुरुष शांत-समाधिस्थ हो गये । सभी लोग उस भजन को सुनकर भावविह्वल हो के बैठे रहे । कुछ देर बाद रामकृष्णदेव की समाधि भंग हुई, मणिमोहन के मिथ्या मोह पर विवेक का कुल्हाड़ा मारते हुए वे बोले : ‘‘आहा ! पुत्रशोक के समान क्या और कोई दूसरा दुःख है ? संसार में कितने दिनों के लिए पुत्रादि के साथ संबंध है ! सुख की आशा से प्रेरित होकर मनुष्य विवाह करता है, संतान होती है, बड़े होने पर उसका विवाह करता है । इस तरह कुछ दिन अच्छी तरह से बीत जाते हैं, उसके बाद कोई बीमार पड़ता है, किसीकी मृत्यु होती है, कोई बुरा रास्ता पकड़ लेता है तब नाना प्रकार की चिंताओं से चित्त विचलित हो उठता है । किन्तु जो सद्गुरु के वचनों को पकड़े रहते हैं, वे इस भयानक शोक में डूबते नहीं ।’’

इस तरह ठाकुर ने युक्तिपूर्वक ‘संसार अनित्य व असार है और एकमात्र सद्गुरु की शरण ही सुख का स्रोत है’ – ऐसा ज्ञान देकर उसके पुत्रशोक से घायल हृदय पर प्रभुप्रेम का मरहम लगाया । मणिमोहन समत्ववान हुआ तथा गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता व अहोभाव प्रकट करते हुए बोला : ‘‘मैं जानता था संसारी मोह से पीड़ित इस हृदय की ज्वाला को सद्गुरु के सिवाय अन्य कोई शांत नहीं कर सकेगा । इसीलिए तो मैं दौड़कर आपके पास चला आया । संसार के मोहरोग के पीड़ितों को ज्ञान-औषधि सद्गुरु के सिवा भला और कौन पिला सकता है !’’

लख चंदा चढ़े, चाहे सूरज चढ़े हजार ।

ऐते चांदण ना होंदा, गुरु विण घोर अंधार ।।

हजारों सूर्य प्रकाशित हो जायें, लाखों चंद्रमाओं की चमक हो जाय फिर भी सच्चा प्रकाश तो गुरु के बिना नहीं मिल सकता ।