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चतुर्दशी – आर्द्रा नक्षत्र योग – २४ जुलाई २०१४

guruji55चतुर्दशी – आर्द्रा नक्षत्र योग (रात्रि ११:५५ से २५ जुलाई दोपहर १२:२७ तक)  ‘ॐकार’  का जप अक्षय फलदायी, प्रदोष व्रत (शाम ७:२१ से रात्रि ९:३१ तक)
मंत्रसिद्धि योग : ॐकार जप
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Mantra for Guru Worship

002ॐ श्री गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री परम गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री परात्पर गुरुभ्यो नमः
ॐ श्री परमेष्टी गुरुभ्यो नमः
अन्यथा शरणं नास्ति, त्वमेव शरणं मम ।
तस्मात कारुण्य भावेन, रक्षस्व परमेश्वर ॥
ये जो मंत्र है, शास्त्रों में गुरु की स्तुति में कहे गए है :-
ॐ ज्ञान मूर्तये नमः
ॐ ज्ञान योगिने नमः
ॐ तीर्थ स्वरूपाय नमः
ॐ जितेन्द्रियाय नमः
ॐ उदारहृदयाय नमः
ॐ भारत गौरवाय नमः
ॐ पावकाय नमः
ॐ पावनाय नमः
ॐ परमेश्वराय नमः
ॐ महर्षये नमः
शास्त्रों मे ज्ञानदाता, भक्ति दाता गुरु की स्तुति मे बड़े सुन्दर मंत्र है,मंत्र इस प्रकार है :-
ॐ अविनाशिने नमः
ॐ सच्चिदानंदाय नमः
ॐ सत्यसंकल्पाय नमः
ॐ संयासिने नमः
ॐ श्रोत्रियाए नमः — श्रोत्रियाए – माने जो सारे शास्त्रों का रहस्य जानते हैं, ऐसे गुरु को हम प्रणाम करते हैं ।
ॐ समबुद्धये नमः — वे सम बुद्धिवाले हैं, पक्षपात नहीं हैं जहाँ ।
ॐ सुमनसे नमः — उनका मन कैसा, बोले मन सुमन हैं, खिले हुए फूल की तरह; खिला हुआ फूल जैसे सब को सुगंध देता हैं, ऐसे वे सबको सुगंध , दिव्य जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं, इसलिये गुरु की यह मन्त्र बोलकर स्तुति की- ॐ सुमनसे नमः – उनके संपर्क में आते रहने से हमारा मन भी सुमन हो जाता हैं । फूल की तरह खिला हुआ रहता हैं; उदास, बेचैन, उद्विग्न, परेशान नहीं रहता ।
ॐ स्वयं ज्योतिषे नमः — माने साधक का भविष्य कैसे सुखद होगा, वो बता देते हैं ।
ॐ शान्तिप्रदाय नमः — वो सबको शान्ति का दान करते हैं, मन की शान्ति ।
ॐ श्रुतिपारगाये नमः – श्रुति माने वेद-उपनिषद ।
ॐ सर्वहितचिन्ताकाय नमः — सबके हित का ख्याल करने वाले और सबके हित की बात करनेवाले गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ साधवे नमः — जो सच्चे साधु हैं, सच्चे संत हैं वास्तव में, उन्हे हमारा प्रणाम हैं ।
ॐ सुहृदे नमः — जो सबके सुहृद हैं, जैसे भगवान सबके सुहृद हैं, ऐसे सद्गुरु भी सबके सुहृद हैं ।
ॐ क्षमाशीलाय नमः — जो क्षमाशील हैं, हमारे दोषों को माफ कर देते हैं, ऐसे गुरु को हमारा प्रणाम हैं ।
ॐ स्थितप्रज्ञयाय नमः
ॐ कृतात्माने नमः
ॐ अद्वितीयाये नमः — अद्वितीय हैं, माने उनसे श्रेष्ट कोई नहीं हैं, ऐसे गुरु को हमारा प्रणाम हैं ।
ॐ करुणासागराये नमः  जो करुणा के सागर हैं, ऐसे गुरु को हमारा प्रणाम हैं ।
ॐ उत्साहवर्धकाय नमः
ॐ उदारहृदयाय नमः — जिनका हृदय उदार हैं, ऐसे गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ आनंदाय नमः — आनंद और शांति का दान करनेवाले गुरु को प्रणाम हो ।
ॐ तापनाशनाय नमः — आदिदैविक ताप, आदिभौतिक ताप, आध्यात्मिक ताप – इन तीन तापों को दूर करनेवाले गुरु को प्रणाम हैं ।{गुरु की वाणी वाणी-गुर, वाणी विच अमॄत सारा}
ॐ दृद निश्चयाय नमः ——दृद निश्चय होने की प्रेरणा देने वाले गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ जनप्रियाय नमः — जो सबके प्रिय हैं, ऐसे गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ छिन्नसंषयाय नमः
ॐ जितेन्द्रियाय नमः — जो जितेन्द्रिय हैं, जिनके सुमिरन से हम भी जितेन्द्रिय हो सकते हैं । इन्द्रियों को जीतनेवाले ऐसे गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ द्वन्द्वातीताय नमः — जो द्वन्द्वों से परे हैं, ऐसे गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ धर्मसंस्थापकाय नमः — धर्म का रहस्य बताने वाले और जन-जन के हृदय में धर्म की स्थापना करनेवाले गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ नारायणाय नमः — गंगाजी कोई साधारण नदी नहीं हैं, हनुमानजी कोई साधारण वानर नहीं हैं, उसी प्रकार गुरु भी कोई साधारण नर नहीं हैं, वो साक्षात नारायण हैं ।
ॐ प्रसन्नात्मने नमः — जो सदैव प्रसन्न रहते हैं और सबको प्रसन्नता बाँटते हैं, ऐसे गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ धैर्यप्रदाय नमः — जिनके दर्शन से, अपने आप धैर्य और शान्ति आ जाती हैं ।
ॐ मधुरस्वाभावये नमः — जिनका मधुर स्वभाव हैं, ऐसे गुरु को हमारा प्रणाम हैं ।
ॐ बंधमोक्षकाय नमः — बंधनों से मुक्ति दिलाने वाले गुरु को प्रणाम हैं ।
ॐ मनोहराय नमः — हमारे मन का हरण करने वाले गुरु को प्रणाम हैं । व्यक्ति के अन्तर मन में से संसार का आकर्षण हठ जाता हैं, गुरु के प्रति , ईश्वर के प्रति, ईश्वर के नाम के प्रति स्वभाविक ही रुचि होने लगती हैं ।