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शिष्य का सद्गुरु में ममत्व – सुरेशानन्दजी

hiteshisadhguru

सत्संग के मुख्य अंश :

* सद्गुरु ने बहुत दिनों बाद शिष्यों को अपना जन्मदिन बताया तो शिष्यों ने गुरूजी के जन्मदिन को मनाने के लिए अच्छी तैयारियां की|

* सबने अच्छे –अच्छे उपहार लाये |

* एक शिष्य बहुत गरीब था उसके पास गुरूजी को देने के लिए कुछ भी नहीं था, वो गुरूजी का दर्शन करने के लिए आया तो उसको गार्ड ने रोक दिया वो बाहर बैठे-बैठे गुरूजी के दर्शन करने का इंतज़ार करने लगा |

* इधर गुरूजी बार-बार बोल रहे थे कि कोई रह तो नहीं गया दर्शन करने के लिए तो बहुत बाद में उन्हें पता चला कि वो गरीब शिष्य रह गया है |

* गुरूजी ने उसे बुलाया, उस शिष्य के नेत्रो से झर-झर आंशू बह रहे थे, उसने गुरूजी से कहा कि आपके जन्मदिन पर मैं कुछ देना चाहता हूँ |

* गुरूजी ने देखा कि शिष्य के पास तो कुछ नहीं हैं फिर भी उन्होंने कहा कि – हाँ बोलो! क्या देना चाहते हो ?

* उस शिष्य ने कहा कि गुरूजी मैं आपको अपनी उम्र देना चाहता हूँ आप सबका कल्याण करते हैं, सबका जीवन सवारंते हैं |

* फिर वह शिष्य गुरूजी के चरणों में दंडवत प्रणाम किया और उसके प्राण गुरूजी के चरणों में विलीन हो गए, शिष्य को सद्गति प्राप्त हो गयी |