Category Archives: Tatvik Satsang

विश्राम पाने की कला – आसाराम बापू जी

vishrampanekikala

आत्मविश्रांति से सामर्थ्य मिलता है |
संसार तेरा घर नहीं , दो चार दिन रहना यहाँ , कर याद अपने राज्य की , स्वराज्य निष्कंटक जहाँ |
चारो तरफ सुदर्शन धारी का चक्र चल रहा है | – एक ही सत्ता, परमात्मा सत्ता – बुध्धि में भगवद्बल कैसे बढे ?
मुझे गाड़ी मिल जाये, पैसे मिल जाये, आखिर क्या ? – इच्छारहित होना – आत्मसुख, आत्मा में शांति पा ले | – कर्म का नियमन – कर्म का फल श्रम रहित अवस्था – शोक, चिंता, ओज, तेज, बल – बीती हुयी बात, भविष्य की चिंता – चिंतन – विश्राम – भगवान में विश्रांति, बापूजी का आशीर्वाद जहा से आ रहा है वह पंहुच ने का राजमार्ग |

नित्य और अनित्य विचार

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तात्त्विक सत्संग के कुछ मुख्य अंश:

जगत की बदलाहट को जो जानता है, वो अबदल परमात्मा है…आत्मा परमात्मा एक सत्ता है, जैसे तरंग और पानी….भगवत प्रसादजा मति और तत्त्व प्रसादजा मति कैसे बनती है?….परमात्मा का हम उपयोग करते हैं या उपभोग…मनुष्य के पास नित्य और अनित्य विचार करने का विवेक/बुद्धि होती है….तुम नित्य परमात्मा के अमृतपुत्र हो…सुख दुःख आ आ कर चले जाते हैं…सदा नहीं रहते…

हम नित्य हैं लेकिन अविवेकी होकर अनित्य जगत का उपभोग करते हैं…आत्मा परमात्मा को पाने का जो उद्देश्य बनाता है उसकी बुद्धि ऊँची हो जाती है….जगत का उपभोग करने वाले नीच योनियों में जाते हैं…नश्वर का उपभोग करने वाले नाश को प्राप्त होते हैं….

भगवान् का स्वभाव जानो और संसार का स्वभाव जानो…बेड़ा पार हो जायेगा….

प्रारब्ध और पुरुषार्थ के सिद्धांत…प्रारब्ध का ही होना है तो पुरुषार्थ क्यों करें?

जिन संतों पर ज्यादा अत्याचार / कुप्रचार होता है, उनका यश उतना ही लम्बे समय तक रहता है और अधिक फैलता है…साईं बाबा (शिरडी वाले) के हयाती काल में इतने लोग नहीं मानते थे जितने आज मानते हैं….विवेकानंद जी, गुरु नानक का खूब कुप्रचार हुआ, लेकिन उनका यश उतना ही अधिक है आज….

शिव भक्त रावण ने कैलाश पर्वत को लंका ले जाने का प्रयास किया…

पूर्व के हल्के संस्कारों को कैसे जीतें?

श्रेष्ठ पुरुष कौन है ?

योग वशिष्ठ सत्संग और उसकी व्याख्या…