Category Archives: Vrat

Ravivari Saptmi

Bapu10Ravivar Saptmi -Sacred Days for Jap and Meditation   See Audio:   
Ravivar Saptmi -Hari Om Sankirtan  See Audio:
Ravivar SaptmiSurya Ko Arghya dene Ka Mantra   See Audio:
Ravivar Saptmi – Incurable diseases can be cured by Surya Upasna on this day  See Audio:

Mangalvari Chaturthi

guru20
अंगारकी चतुर्थी  मंगलवार – १० मई  २०१६ ( सूर्योदय से दोपहर  १२.३३ तक )  
 

सर्व फलदायक जन्माष्टमी व्रत-उपवास (जन्माष्टमी व्रत : २५ अगस्त)

janmashtmi
सर्व फलदायक जन्माष्टमी व्रत-उपवास (जन्माष्टमी व्रत : २५ अगस्त)

जन्माष्टमी व्रत अति पुण्यदायी है | ‘स्कंद पुराण’ में आता है कि ‘जो लोग जन्माष्टमी व्रत करते हैं या करवाते हैं, उनके समीप सदा लक्ष्मी स्थिर रहती है | व्रत करनेवाले के सारे कार्य सिद्ध होते हैं | जो इसकी महिमा जानकर भी जन्माष्टमी व्रत नहीं करते, वे मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होते हैं |’

बीमार, बालक, अति कमजोर तथा बूढ़े लोग अनुकूलता के अनुसार थोडा फल आदि ले सकते हैं |

विष्णुपदी संक्रांति- १६ अगस्त २०१६

brahma-emerging-from-navel-of-vishnu-with-lakshmi-QI96_lजप तिथि : १६ अगस्त २०१६  ( विष्णुपदी संक्रांति )

पुण्य काल सुबह  १०-३९ से १७ अगस्त २०१६ सूर्योदय तक | इस में किया गया जप , ध्यान , पुण्य कर्म लाख गुना पुण्यदायी होता है |

पुण्य काल, जप, ध्यान और इस समय के दौरान प्रदर्शन पुण्य कर्मों लाख गुना अधिक फायदेमंद होते हैं | –  ( पद्म पुराण , सृष्टि खंड )

विष्णुपदी संक्रांति विशेष ॐकार कीर्तन

 

Bhom pradosh Vrat Mantra and Poojan Vidhi (Helpful in removal of debt)-5 April 2016

bapuji

आर्थिक परेशानी या कर्जा हो तो
किसी को आर्थिक परेशानी या कर्जा हो तो भोम प्रदोष योग हो, उस दिन शाम को सूर्य अस्त के समय घर के आसपास कोई शिवजी का मंदिर हो तो जाए और ५ बत्ती वाला दीपक जलाये और थोड़ी देर जप करें :
ये मंत्र बोले :
ॐ भौमाय नमः
ॐ मंगलाय नमः
ॐ भुजाय नमः
ॐ रुन्ह्र्ताय नमः
ॐ भूमिपुत्राय नमः
ॐ अंगारकाय नमः
और हर मंगलवार को ये मंगल की स्तुति करें:-
” गर्णी गर्भ शंभुतं, विधुत कान्ति समप्रभ
कुमारं शक्ति हस्त, मंगलं प्रणाममहं “

Vaishaakh Maas Mein Teerth, Satsang Ki Bhaari Mahima

vaishakhsnanवैशाख-स्नान व्रत – ४ अप्रैल से ४ मई तक  

(प्रात: ब्राह्ममुहूर्त में स्नान करने से अनेक जन्मों की उपार्जित पापराशि का नाश | वैशाख-स्नान तथा व्रत, जप, नियम से अत्यंत दुर्लभ वस्तु की प्राप्ति |)