Category Archives: Vrat

सोमवती अमावस्या – २८ नवम्बर २०१६

somvati

सोमवती अमावस्या – २८ नवम्बर २०१६ ( दोपहर ३-२१ से २९ नवम्बर सूर्योदय तक )

सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ओंकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा है, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी l

साधना में तीव्रता से आगे बढने के लिए :

पूज्य बापू जी ने कहा है की सोमवती अमावस्या के दिन किया गया जप ध्यान लाख गुना फलदायी होता है | जितना फल दीवाली ,जन्माष्टमी,होली और शिवरात्रि के दिनों में जप ध्यान करने से होता है उतना ही फल सोमवती अमावस्या के दिन भी करने से होता है |

पूज्य बापू जी ने कहा की साधको को साधना में उन्नति के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :

१: मौन का अधिक से अधिक सेवन करे या जितना कम संभव हो उतना कम बोले |

२: अधिक से अधिक समय जप और ध्यान में लगाये |

३: उपवास करे और सिर्फ दूध का सेवन करे |

४: सोमवती अमावस्या के दिन और उससे एक रात पहले भूमि पर शयन का करें |

५: सोमवती अमावस्या से एक रात्रि पहले साधकों को चाहिए की वो एक मजबूत संकल्प ले की मै कल मौन रखूँगा सद्ग्रंथो जैसे की जीवन रसायन ,इश्वर की ओर और दिव्य प्रेरणा प्रकाश का पठन करूँगा और अपने आपको सतत जप और ध्यान में संलग्न रखूँगा |
महत्वपूर्ण संकेत :
पूज्य बापू जी ने कहा है की जो स्त्रियां अपने मासिक धर्म में हो वो इन सभी संकेतों को पालन करने से मुक्त है | परन्तु और सभी साधकों को ये नियम अवश्य पालन करना चाहिए |

Part – 1 

Part – 2 

Part – 3

सर्व फलदायक जन्माष्टमी व्रत-उपवास (जन्माष्टमी व्रत : २५ अगस्त)

janmashtmi
सर्व फलदायक जन्माष्टमी व्रत-उपवास (जन्माष्टमी व्रत : २५ अगस्त)

जन्माष्टमी व्रत अति पुण्यदायी है | ‘स्कंद पुराण’ में आता है कि ‘जो लोग जन्माष्टमी व्रत करते हैं या करवाते हैं, उनके समीप सदा लक्ष्मी स्थिर रहती है | व्रत करनेवाले के सारे कार्य सिद्ध होते हैं | जो इसकी महिमा जानकर भी जन्माष्टमी व्रत नहीं करते, वे मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होते हैं |’

बीमार, बालक, अति कमजोर तथा बूढ़े लोग अनुकूलता के अनुसार थोडा फल आदि ले सकते हैं |

विष्णुपदी संक्रांति- १६ अगस्त २०१६

brahma-emerging-from-navel-of-vishnu-with-lakshmi-QI96_lजप तिथि : १६ अगस्त २०१६  ( विष्णुपदी संक्रांति )

पुण्य काल सुबह  १०-३९ से १७ अगस्त २०१६ सूर्योदय तक | इस में किया गया जप , ध्यान , पुण्य कर्म लाख गुना पुण्यदायी होता है |

पुण्य काल, जप, ध्यान और इस समय के दौरान प्रदर्शन पुण्य कर्मों लाख गुना अधिक फायदेमंद होते हैं | –  ( पद्म पुराण , सृष्टि खंड )

विष्णुपदी संक्रांति विशेष ॐकार कीर्तन

 

गौ व तुलसी पूजन रायपुर आश्रम

गौ व तुलसी पूजन रायपुर आश्रम 

4 जुलाई को सोमवती अमावस्या पर रायपुर आश्रम में साधको ने सर्वमांगल्या  हेतु गौ व तुलसी पूजन कार्यक्रम किया गया |DSCN0563

DSCN0545 DSCN1129

हनुमान चालीसा की ५ चमत्कारी चौपाइयाँ

hanumanji

धार्मिक ग्रंथ

धार्मिक उपदेशों, ग्रंथों में वह ताकत है जो हमारे दुखों का निवारण करती है, इस बात में कोई संदेह नहीं है। जब भी हम परेशान होते हैं तो अपनी समस्या का हल पाने के लिए शास्त्रीय उपायों का इस्तेमाल जरूर करते हैं। इसे आप चमत्कार ही कह लीजिए, लेकिन शास्त्रों में हमारी हर समस्या का समाधान है।

हनुमान चालीसा

भगवान हनुमान को समर्पित हनुमान चालीसा के बारे में कौन नहीं जानता, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रची गई हनुमान चालीसा में वह चमत्कारी शक्ति है जो हमारे दुखों को हर लेती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस चमत्कार का रहस्य क्या है?

कहते हैं कि सभी देवतागण ने जिन मंत्रों और हनुमानजी की विशेषताओं को बताते हुए उन्हें शक्ति प्रदान की थी, उन्हीं मंत्रों के सार को गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में वर्णित किया है। इसलिए हनुमान चालीसा पाठ को चमत्कारी माना गया है।

हनुमान चालीसा की शक्ति

परंतु हनुमान चालीसा में तो कोई मंत्र है ही नहीं, फिर मंत्रों के बिना भी वह चमत्कारी प्रभाव देने में सक्षम कैसे है? दरअसल हनुमान चालीसा में मंत्र ना होकर हनुमानजी की पराक्रम की विशेषताएं बताई गईं हैं। कहते हैं इन्हीं का जाप करने से व्यक्ति सुख प्राप्त करता है।

पाँच  चौपाइयाँ 

चलिए आपको बताते हैं हनुमान चालीसा की उन ५ चौपाइयों के बारे में, जिनका यदि नियमित सच्चे मन से वाचन किया जाए तो यह परम फलदायी सिद्ध होती हैं।

इस दिन करें जप

हनुमान चालीसा का वाचन मंगलवार या शनिवार को करना परम शुभ होता है। ध्यान रखें हनुमान चालीसा की इन चौपाइयों को पढ़ते समय उच्चारण में कोई गलती ना हो।

पहली चौपाइ

भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे।।

लाभ

इस चौपाइ का निरंतर जाप उस व्यक्ति को करना चाहिए जिसे किसी का भय सताता हो। इस चौपाइ का नित्य रोज प्रातः और सायंकाल में 108 बार जाप किया जाए तो सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।

दूसरी चौपाइ

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

लाभ

यदि कोई व्यक्ति बीमारियों से घिरा रहता है, अनेक इलाज कराने के बाद भी वह सुख नही पा रहा, तो उसे इस चौपाइ का जाप करना चाहिए। इस चौपाइ का जाप निरंतर सुबह-शाम 108 बार करना चाहिए। इसके अलावा मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के सामने बैठकर पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, इससे जल्द ही व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है।

तीसरी चौपाइ

अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।

लाभ

यह चौपाइ व्यक्ति को समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। यदि किसी को भी जीवन में शक्तियों की प्राप्ति करनी हो, ताकि वह कठिन समय में खुद को कमजोर ना पाए तो नित्य रोज, ब्रह्म मुहूर्त में आधा घंटा इन पंक्तियों का जप करे, लाभ प्राप्त हो जाएगा।

चौथी चौपाइ

विद्यावान गुनी अति चातुर। रामकाज करिबे को आतुर।।

लाभ

यदि किसी व्यक्ति को विद्या और धन चाहिए तो इन पंक्तियों के जप से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। प्रतिदिन 108 बार ध्यानपूर्वक जप करने से व्यक्ति के धन सम्बंधित दुःख दूर हो जाते हैं।

पांचवीं चौपाइ

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।

लाभ

जीवन में ऐसा कई बार होता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद कार्य में विघ्न प्रकट होते हैं। यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है तो उपरोक्त दी गई चौपाइ का कम से कम 108 बार जप करें, लाभ होगा।

हनुमान चालीसा का महत्व

किंतु हनुमान चालीसा का महत्व केवल इन पांच चौपाइयों तक सीमित नहीं है। पूर्ण हनुमान चालीसा का भी अपना एक महत्व एवं इस पाठ को पढ़ने का लाभ है, जिससे आम लोग अनजान हैं।

हनुमान चालीसा का पाठ

बहुत कम लोग जानते हैं कि हिन्दू धर्म में हनुमान जी की आराधना हेतु ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ सर्वमान्य साधन है। इसका पाठ सनातन जगत में जितना प्रचलित है, उतना किसी और वंदना या पूजन आदि में नहीं दिखाई देता।

फलदायी

‘श्री हनुमान चालीसा’ के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं। इसीलिए ‘रामचरितमानस’ की भाँति यह हनुमान गुणगाथा फलदायी मानी गई है।

Bhom pradosh Vrat Mantra and Poojan Vidhi (Helpful in removal of debt)-5 April 2016

bapuji

आर्थिक परेशानी या कर्जा हो तो
किसी को आर्थिक परेशानी या कर्जा हो तो भोम प्रदोष योग हो, उस दिन शाम को सूर्य अस्त के समय घर के आसपास कोई शिवजी का मंदिर हो तो जाए और ५ बत्ती वाला दीपक जलाये और थोड़ी देर जप करें :
ये मंत्र बोले :
ॐ भौमाय नमः
ॐ मंगलाय नमः
ॐ भुजाय नमः
ॐ रुन्ह्र्ताय नमः
ॐ भूमिपुत्राय नमः
ॐ अंगारकाय नमः
और हर मंगलवार को ये मंगल की स्तुति करें:-
” गर्णी गर्भ शंभुतं, विधुत कान्ति समप्रभ
कुमारं शक्ति हस्त, मंगलं प्रणाममहं “

Vaishaakh Maas Mein Teerth, Satsang Ki Bhaari Mahima

vaishakhsnanवैशाख-स्नान व्रत – ४ अप्रैल से ४ मई तक  

(प्रात: ब्राह्ममुहूर्त में स्नान करने से अनेक जन्मों की उपार्जित पापराशि का नाश | वैशाख-स्नान तथा व्रत, जप, नियम से अत्यंत दुर्लभ वस्तु की प्राप्ति |)