दादागुरु का गांधीजी के लिए संकल्प – (बापूजी की लीला- १६)

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महात्मा गाँधी हरिजन उद्धार के लिए अन्न त्याग संकल्प लेके बैठे | मेरे लीलाशाह को पता चला | अपने सेवकों को बुलाया | शहजादपुर से एकांत में जे.पी.नगर है | बोले गाँधी के प्राण न जाये गाँधी जीये और उनका काम बने | ऐसा आपन संकल्प करे, संकल्प में बडी ताकद है | जीये गाँधी जीये वा गाँधी वा जीये गाँधी जीये | जब भी टाईम मिले ऐसा बोल देना | अब लोकों को ये बात साधारण नहीं है | लेकिन जिस भक्त ने अपना अनुभव बताया | सांई लीलाशाह का संकल्प और हम लोगों की भावना गांधीजी को सफलता भी दिलाई और जीये भी कई साल | नहीं तो ऐसा उपवास | ऐसी मेरी तब्येत ६० साल में तो हाथो से जा रही और आप लोगों ने – साधक माँगे माँगना प्रभु दियो मज दो बापू हमारे स्वस्थ रहें आयु लम्बी हो |
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