Where Ever You Are Start Your Journey of Self-Realization

self relisation
सत्संग के मुख्य अंश :

* इतना अज्ञान, इतनी नासमझी कि भगवान राम जी का राज्य, सुख, वैभव त्यागकर, कौशल्या, सुमित्रा, कैकेयी श्रृंगी ऋषि के आश्रम में गयी और अज्ञान इतना कि घर में बैठकर भजन करना चाहिए बापूजी ने कहा है

* जो जहाँ है का मतलब — बाहर न भटके अपने अंदर से, अंतरात्मा से यात्रा शुरू करे

* कबीर जी ने ऐसे लोगो को कहा है
भटक मुआ भेदू बिना पावे कौन उपाय |
खोजत-खोजत युग गए पाँव कोश गहराई ||

* जब तक हम नहीं चाहेंगे तब तक भगवान, शास्त्र क्या करेंगे, बोले शास्त्र, भगवान दयालु है

* मनुष्य जीवन भोग योनी नहीं है यह एक ऐसा जीवन है कि इसमें भगवान का मित्र बन सकता है, सखा बन सकता है, भगवत तत्त्व का ज्ञानी बन सकता है, भगवान की लीला का रहस्य जान सकता है, और भगवान की आत्मा को और अपने आत्मा को एकत्व में देख सकता है, ये मनुष्य को भगवान ने स्वतंत्रता दी है