गुरु अष्टकम

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अपने कुछ साधक बापूजी से मिलने गये थे पूनम के दिन तो उनका दर्शन तो नहीं हुआ लेकिन जो साधक भाई बापूजी के साथ है,  उनको बापूजी ने बोला की सभी साधकों ने गुरुअष्टक का पाठ करें |

गुरुअष्टक का पाठ करने से कभी भी शिष्य गुरु से दूर नहीं रहेता और नहीं रहेगा | और उससे शिष्यों की मन की इच्छा भी पूरी हो जाती है (पैसा, नौकरी, धंदा इत्यादि)  तो सभी इसका लाभ लें |

तो ज्यादा से ज्यादा उसका पाठ करें, सुने- दिनमें जितनी बार हो सके उतनी बार करें |