I Do Not Want Anything – Story of Disciple Sandipani (Guru of Shri Krishnaji)

gurusandipani
शिष्य संदीपनी की कहानी – मुझे कुछ नहीं चाहिए (परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी)

सत्संग के मुख्य अंश :

* संदापनी विद्यार्थी थे, तो उनके गुरु जी ने कहा कि एक-दो दिन में हम शरीर छोड़ देंगे, जिसे जो चाहिए मांग लो | किसी ने गुरु जी की लेखनी, किसी ने खडाऊं, पुस्तक, चादर, लोटा, छड़ी | जिसको जो चाहिए था गुरु जी ने कहा कि ये तुम्हारा, ले लेना |

* एक शिष्य एकटक गुरु जी को देख रहा था, गुरु जी ने कहा तुझे भी जो चाहिए ले ले | वो गुरु जी को देखकर शान्तात्मा हो गया था, उसने सिर हिलाकर नकार दिया कि कुछ नहीं चाहिए |

* गुरु ने कहा कि तुझे तो कुछ नहीं चाहिए लेकिन भगवान श्री कृष्ण का जो अवतार हुआ है न, तू तो मेरा शिष्य है, भगवान कृष्ण तेरे शिष्य बनेंगे | अपने शिष्य को भगवान का गुरु बना दिया संदीपनी के गुरु ने |

* गुरुतत्व में जो रहता है, ॐकार की उपासना करता है, गुरु के ज्ञान में उपासना करता है उसके संकल्प देर सवेर फलित होते है |