Increase your Vital Energy by effectively Managing Daily Routine -Pujya Asaramji Bapu

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जिस समय जीवनी शक्ति जिस अंग में ज्यादा हो उस समय उस अंग से काम लेने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है |
* सुबह ३ से ५ के बीच प्राणायाम हो जाना चाहिये |
* ५ से ७ के बीच घूमना, टहलना और जरूरी शौच का काम हो जाना चाहिये |
* ७ से ९ के बीच कुछ पी लें – दूध, जल्दी पचेगा |
* ९ से ११ के बीच भोजन कर लें |
* ११ से १ के बीच हृदय विकसित होता है, खाना नही खाना चाहिये |
* १ से ३ के बीच खाना नही खाए, पचे हुए खाने का रस शोषित किया जाता है |
* ३ से ५ के बीच पानी पी लें, मूत्राशय में जीवनी शक्ति होती है |
* पत्थरी का ऑपरेशन नहियो कराये | पत्थर चट पौधे के २ पत्ते धो के चबाके खा लें     कुछ दिन | पत्थरी खत्म |
* किडनी और कान के रोग ठीक करने हों तो ५ से ७ के बीच भोजन क्र लें |
* ९, से ९.१५ थोडा दूध ले सकते हैं अगर लेना चाहें तो |
* ७ से ९ के बीच पढ़े |
* ९ से ११ मेरु रजु में जीवनी शक्ति, यदि आराम करें तो – सीधे या करवट लेकर सोना     चाहिए, विश्राम अच्छा |
* ११ से १ के बीच जीवनी शक्ति पित्ताशय में, जागने से पित्त सबंधी रोग, नेत्र सम्बन्धी   रोग और हार्ट अटेक |
* १ से ३ के बीच लीवर में जीवनी शक्ति |
* पीलिया हों तो १ चुटकी कच्चे चावल फाँके | ॐ खं (खम) ये मन्त्र जपे |