हमेशा कृत्रिम रंग खायेंगे तो ?

krutrimrangहमेशा कृत्रिम रंग खायेंगे तो ?

[ अस्थमा, पेटदर्द और हायपर अँक्टिव्हिटी का सामना करना पड़ता है | ] 

चॉकलेट, आइसक्रीम, न्यूडल्स, फ्रोजन फूड, पैकफूड, कोल्डड्रिंक्स, चायनीज आदि कृत्रिम रंगका उपयोग किये हुई चीजें; हमेशा खाने से बच्चों की एकाग्रता कम होती है, अस्थमा, हायपर अँक्टिव्हिटी, थायराइड का आदि विकार होते है |

बड़ों को भी पेटदर्द, अस्थमा आदि के विकार हो सकते है |

लंडन में खाद्यपदार्थ तैयार करनेवाली कंपनियाँ, होटल्स को खाने का रंग का इस्तेमाल करना मनाई है | क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने एक सर्व्हे किया था, उसमें खाने रंग से बच्चों में हायपरसेंसिटिव्हिटी और कैंसर के गुण दिखायी दिये | साऊथटन युनिव्हर्सिटी किया हुआ एक सर्व्हे में ऐसा देखा गया की सिंथेटिक डाय किया हुआ और सोडियम बेन्झोट सरिका प्रिझव्हेटिव मिक्स करके जो खाद्यान्न खाने से ३ से ९ उम्रवाले बच्चों में हायपरसेंसिटिव्हिटी बढती जा रही है |

किसी के तो बौद्धिक क्षमता के ऊपर ही उसका परिणाम देखने को आ रहा है |

नीला रंग –
केक, बिस्कुट, कुकीज ऐसे पदार्थ में नीला रंग ज्यादातर यूज किया जाता है | इसके आलावा शीतपेय, बच्चों की गोलियाँ, चॉकलेट, डॉगफूड आदि में नीला रंग का इस्तेमाल किया जाता है | तो ये चीजे न खाना ठीक है |

लाल रंग –
इस रंग का अति इस्तेमाल करने से शुद्ध हरपना, पेट की आँतों को ये लाल रंग हानिकारक है |

टेट्राझाईंन पीला और सनसेट यलो –
इस रंग से हायपरसेंसिटिव्हिटी रिअँक्शन आती है |

हरा रंग –
सब्जी और फलों को गाढ़ा रंग आनेके लिये हरा रंग का इस्तेमाल किया जाता है |

सिंथेटिक रंग –
ऑरेंज, स्वँक्स डेअरी प्रोडक्ट्स, बेकरीकी चीजे, मिठाई, शीतपेय इसमें सिंथेटिक रंग का इस्तेमाल किया जाता है

तो हमेश कृत्रिम रंग के पदार्थ खाने से सावधान रहें |