पूज्य बापूजी का माघी पूर्णिमा पर साधकों के लिए सन्देश

Gurujiजोधपुर और दिल्ली के डॉक्टरों को खूब-खूब धन्यवाद |
इन गंभीर बीमारियों को खोज निकाला, मैं तो 2 बीमारी मानता था, उन्होंने 5-6 बिमारी बतायी |
मैं ओपरेशन से बचना चाहता था, उन्होंने बिना ओपरेशन के उपचार भी खोज निकाला | अभी थोडा-थोडा आराम भी है | और तुम्हारे बीच जल्दी आने के दिन नजदीक आ रहे है |
मौज हो गई ना ….
सबकी तपश्चर्या, धैर्य को किन शब्दों में वर्णन करूँ | अब रु-बरू बता दूंगा |
ओम, ओम…हास्य प्रयोग |
सोऽहं…सोऽहं….
हजाम अपने बाल नहीं काटता, डॉक्टर अपना इलाज खुद नहीं करता, वकील अपना केस खुद नहीं लड़ता, ऐसे ही संत अपने केस के लिए…..
इसीलिए तुम्हारे संकल्पों से सब-कुछ ठीक हो जाएगा | सब कुछ संकल्पों की दुनिया है |
ओम शांति…ओम आनंद….हरि ओम…
मेरे साधक सफल हो रहे हैं |
स्वर्ग के देवताओं का पुण्यनाश होता है, तब भोग मिलते हैं और फिर पुण्यनाश होता है | धरती के देवताओं को सत्संग व सेवा मिलती है | उससे पापनाश होता है | उन्हें धर्मात्मा मिलते हैं |