महपुरुषों का उद्गार

bahujan samaj“तन तन्दुरूस्त, मन प्रसन्न, बुद्धि बुद्धिदाता के प्रकाश में पावन कर दो। मरने के बाद की किसने देखी। जाग्रत में भी उस परमात्मा की शरण जाओ। इसी में तुम्हारा मंगल है।” -ब्रह्मनिष्ठ संत श्री महाराज लीलाशाहजी महाराज

“भगवान बुद्ध का, कबीर जी का कुप्रचार हुआ, नानक जी का इतना कुप्रचार हुआ कि उन्हें जेल भेज दिया गया। सुकरात को जहर दे दिया गया। कुप्रचार करने वाले अभागे अपनी परंपरा बरकरार रख रहे हैं, जो सुप्रचार में लगे हुए सत्संगी सज्जन अपना सुप्रचार और सदयात्रा, ईश्वरप्राप्त क्यों छोड़ेंगे ? क्यों भ्रमित होंगे ?”   परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू

”प्यारे भारतवासियो ! अपने प्यारे बच्चों की शिक्षा ‘डी-ओ-जी-डॉग अर्थात् कुत्ता’ से आरम्भ न करके ‘जी-ओ-डी गॉड अर्थात् ईश्वर’ ज्ञानियों के उपदेश ‘ॐ’ से आरम्भ करो। यदि ऐसा न कर सको तो उसको कॉलेज में भेजने से पहले किसी पूर्ण ज्ञानवान के सत्संग में छोड़ दो।”   स्वामी रामतीर्थ

भारत के वेद युवानों का आवाहन कर रहे हैं- “आओ, जिस पर सुखसहित अनुगमन किया जा सकता है और जहाँ पाप का अपराधरूपी बाधाओं का भय नहीं है, ऐसे पथ पर चलकर हम उन्नति को प्राप्त करें।”   (Yajurvedah 4.29)

“हे युवाओ ! अब समय नहीं है और सोने का। हमको अपनी जड़ता से जागना ही होगा, आलस्य त्यागना ही होगा और कर्म में जुट जाना होगा।”   नेता जी सुभाष चन्द्र बोस

“गीता एक ऐसा ग्रन्थ है जिसे प्रत्येक हिन्दू को पढ़ना चाहिए। यदि यह इसको पढ़ता नहीं, जानता नहीं तो वास्तव मे वह हिन्दू कहा जाने योग्य है या नहीं इसमें मुझे संदेह होगा। यह दुःख की बात है कि आज के नवयुवक इस (भारतीय संस्कृति के) ग्रंथों से अपना कम संपर्क रखते हैं। यह आवश्यक है कि वे गीता का अध्ययन करें, कुछ समझें और अपने जीवन में इसको थोड़ा बहुत उतारने की कोशिश करें।”    भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री